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सिरमौर के छोटे से गांव चांदपुर ने रचा इतिहास, हिमाचल रग्बी टीम को दिए 6 कप्तान; कोटडी व्यास स्कूल की बड़ी उपलब्धि
सिर्फ 25 परिवारों के गांव से निकलीं प्रदेश की रग्बी प्रतिभाएं, दो साल में छह खिलाड़ियों ने संभाली हिमाचल टीम की कप्तानी।
शहीद कमल कांत मेमोरियल स्कूल कोटडी व्यास के खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय स्तर पर बनाई पहचान, ग्रामीण खेल प्रतिभा की मिसाल बना सिरमौर।
पांवटा साहिब (सिरमौर)। बड़े शहरों और आधुनिक खेल सुविधाओं के बिना भी अगर हौसले बुलंद हों तो ग्रामीण क्षेत्रों की प्रतिभाएं इतिहास रच सकती हैं। इसकी शानदार मिसाल जिला सिरमौर के कोटडी व्यास क्षेत्र ने पेश की है। यहां के शहीद कमल कांत मेमोरियल राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने पिछले दो वर्षों में हिमाचल प्रदेश रग्बी टीम को छह कप्तान देकर क्षेत्र का नाम प्रदेशभर में रोशन किया है।
इस उपलब्धि की सबसे खास बात यह है कि इन प्रतिभाओं में तीन खिलाड़ी महज 25 परिवारों की आबादी वाले छोटे से गांव चांदपुर से संबंध रखते हैं। सीमित संसाधनों के बीच ग्रामीण क्षेत्र से इतनी बड़ी संख्या में राज्य स्तरीय कप्तान निकलना अपने आप में उल्लेखनीय उपलब्धि है।
छह खिलाड़ियों ने संभाली हिमाचल टीम की कमान
विद्यालय और क्षेत्र का गौरव बढ़ाने वाले खिलाड़ियों में अंकिता, स्नेहा, दीपिका, दिव्यांशी और आर्यन सहित छह कप्तानों का योगदान रहा है। इन खिलाड़ियों ने अलग-अलग आयु वर्गों में हिमाचल प्रदेश की रग्बी टीम का नेतृत्व किया है।
अंकिता, पुत्री राजकुमार निवासी चांदपुर, हिमाचल प्रदेश अंडर-18 ओपन वर्ग रग्बी टीम की कप्तान रह चुकी हैं। वहीं, स्नेहा, पुत्री स्वर्गीय हेमराज निवासी निचली कोटडी, ने भी अंडर-18 ओपन वर्ग में प्रदेश टीम की कप्तानी की है। स्नेहा ने खेल के दूसरे क्षेत्र में भी शानदार प्रदर्शन करते हुए अंडर-19 गर्ल्स हैंडबॉल नेशनल गेम्स 2025-26 में स्वर्ण पदक हासिल किया है।
दीपिका, पुत्री बबर राज निवासी उपरली कोटडी, ने भुवनेश्वर में आयोजित प्रतियोगिता में हिमाचल प्रदेश की अंडर-15 ओपन रग्बी टीम की कमान संभाली।
वहीं, दिव्यांशी, पुत्री पवन निवासी चांदपुर, दिल्ली में आयोजित SGFI गेम्स 2026 के लिए हिमाचल प्रदेश अंडर-17 गर्ल्स रग्बी टीम की कप्तान हैं। आर्यन, पुत्र राज निवासी उपरली कोटडी, अंडर-19 रग्बी टीम का नेतृत्व कर रहे हैं।
इसी कड़ी में स्नेहा, पुत्री सलिंदर निवासी चांदपुर, वर्तमान में नई दिल्ली के त्यागराज स्टेडियम में आयोजित SGFI प्रतियोगिता में हिमाचल प्रदेश की अंडर-19 टीम की कप्तानी कर रही हैं।
25 परिवारों के गांव की तीन बेटियों ने बढ़ाया मान
इस उपलब्धि में चांदपुर गांव की भूमिका विशेष रूप से उल्लेखनीय है। महज 25 परिवारों वाले इस छोटे से गांव से तीन खिलाड़ियों का प्रदेश की रग्बी टीमों की कप्तानी तक पहुंचना ग्रामीण खेल प्रतिभा की बड़ी सफलता है।
इन खिलाड़ियों ने साबित किया है कि प्रतिभा किसी बड़े शहर या महंगी खेल सुविधाओं की मोहताज नहीं होती। उचित मार्गदर्शन, निरंतर अभ्यास, अनुशासन और मेहनत के दम पर छोटे गांवों से भी राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी तैयार हो सकते हैं।
कोच धर्मेंद्र चौधरी के मार्गदर्शन में मिली सफलता
इस उपलब्धि के पीछे विद्यालय के शारीरिक शिक्षा शिक्षक एवं मुख्य कोच धर्मेंद्र चौधरी की अहम भूमिका रही है। उनके निरंतर मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और खिलाड़ियों के प्रति समर्पण ने ग्रामीण क्षेत्र की खेल प्रतिभाओं को निखारने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
खिलाड़ियों की इस उपलब्धि पर विद्यालय के प्रधानाचार्य जीवन प्रकाश जोशी, समस्त विद्यालय स्टाफ, एसएमसी अध्यक्ष मान सिंह, स्थानीय अभिभावकों और खेल प्रेमियों ने खुशी जाहिर की है।
सुखविंदर चौधरी, पवन कुमार, मान सिंह, पूर्व प्रधान सुरेश कुमार, हतिन्दर कुमार और राजेश कुमार सहित क्षेत्र के लोगों ने खिलाड़ियों और कोच को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।
कोटडी व्यास की यह उपलब्धि न केवल सिरमौर बल्कि पूरे हिमाचल के ग्रामीण क्षेत्रों के लिए प्रेरणा है। चांदपुर की छोटी सी आबादी और यहां से निकलने वाली बड़ी खेल प्रतिभाओं ने यह संदेश दिया है कि सपने बड़े हों तो गांव की सीमाएं भी रास्ता नहीं रोक सकतीं।
