हिमाचल के स्कूलों में पुरानी व्यवस्था बरकरार, शीतकालीन स्कूलों में दिसंबर तो ग्रीष्मकालीन में फरवरी में होंगी परीक्षाएं
शिमला। हिमाचल प्रदेश के स्कूलों में परीक्षा कैलेंडर बदलने की तैयारी पर फिलहाल विराम लग गया है। अब विद्यार्थियों को नई व्यवस्था के अनुसार परीक्षा देने की जरूरत नहीं होगी, क्योंकि शिक्षा विभाग ने पुरानी व्यवस्था को ही जारी रखने का फैसला लिया है।
इसके तहत प्रदेश के शीतकालीन स्कूलों में नॉन बोर्ड कक्षाओं की वार्षिक परीक्षाएं दिसंबर में और ग्रीष्मकालीन स्कूलों में फरवरी में ही आयोजित की जाएंगी।
दरअसल, स्कूल शिक्षा निदेशालय ने प्रदेश के सभी सरकारी स्कूलों में नॉन बोर्ड कक्षाओं की परीक्षाएं एक ही समय पर करवाने की योजना बनाई थी। इस प्रस्ताव के अनुसार शीतकालीन और ग्रीष्मकालीन स्कूलों का परीक्षा शेड्यूल समान करने के साथ ही दोनों श्रेणियों में नया शैक्षणिक सत्र फरवरी से शुरू करने की तैयारी थी।
विभाग का मानना था कि इससे प्रदेशभर के स्कूलों में पढ़ाई, परीक्षा और शैक्षणिक गतिविधियों के संचालन में एकरूपता लाई जा सकेगी। हालांकि, इस प्रस्ताव को धरातल पर लागू करने में कई व्यावहारिक अड़चनें सामने आईं।
अलग-अलग मौसम और छुट्टियों का कैलेंडर बना बाधा
हिमाचल प्रदेश की भौगोलिक परिस्थितियां और अलग-अलग क्षेत्रों का मौसम स्कूलों के संचालन को प्रभावित करता है। इसी वजह से शीतकालीन और ग्रीष्मकालीन स्कूलों के लिए छुट्टियों का कैलेंडर भी अलग-अलग निर्धारित किया जाता है।
यदि दोनों श्रेणियों के स्कूलों में परीक्षाएं एक साथ आयोजित की जातीं और फरवरी से नया शैक्षणिक सत्र शुरू किया जाता, तो मौजूदा अवकाश व्यवस्था में भी बड़े बदलाव करने पड़ते। छुट्टियों के नए शेड्यूल को तय करना विभाग के लिए चुनौतीपूर्ण बन गया।
इन परिस्थितियों और विभिन्न पहलुओं पर विचार करने के बाद शिक्षा निदेशालय ने प्रस्तावित बदलाव को फिलहाल स्थगित रखने का निर्णय लिया है।
विद्यार्थियों को नहीं बदलना पड़ेगा परीक्षा का शेड्यूल
इस फैसले के बाद प्रदेश के स्कूलों में पहले की तरह ही अलग-अलग परीक्षा व्यवस्था लागू रहेगी। शीतकालीन स्कूलों के विद्यार्थियों की वार्षिक परीक्षाएं दिसंबर में होंगी, जबकि ग्रीष्मकालीन स्कूलों में परीक्षा फरवरी में आयोजित की जाएगी। यानी फिलहाल प्रदेश के सरकारी स्कूलों के परीक्षा कैलेंडर में कोई बदलाव नहीं होगा।
