हिमाचल में मिठाइयों की दुकानों पर खाद्य सुरक्षा विभाग की छापेमारी, रसगुल्ले-चमचम में मिले मरे हुए रंगड़; 65 किलो मिठाई नष्ट
त्योहारों पर मिठाई खरीदने से पहले सावधान हो जाइए! हिमाचल प्रदेश में खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच के दौरान मिठाइयों की गुणवत्ता को लेकर ऐसी लापरवाही सामने आई है, जिसने दुकानों में खाद्य पदार्थों के रखरखाव पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कांगड़ा। कहीं रसगुल्ले और चमचम में मरे हुए रंगड़ मिले तो कहीं कलाकंद और दूसरी मिठाइयों पर फंगस पाई गई। मामला कांगड़ा जिले के नूरपुर, जसूर, रेहन और फतेहपुर क्षेत्र का है। विभाग की टीम ने कार्रवाई करते हुए करीब 65 किलोग्राम खराब मिठाई मौके पर ही नष्ट करवा दी।
चार क्षेत्रों में दुकानों का किया निरीक्षण
जानकारी के अनुसार, शनिवार को खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने नूरपुर, जसूर, रेहन और फतेहपुर में मिठाई की दुकानों का निरीक्षण किया। इस दौरान मिठाइयों की गुणवत्ता, उनके भंडारण और दुकानों में साफ-सफाई की व्यवस्था को जांचा गया।
निरीक्षण के दौरान नूरपुर और रेहन में रसगुल्ले और चमचम के अंदर मरे हुए रंगड़ पाए गए। इसके अलावा कलाकंद, रसगुल्ला, बेसन, मिल्क केक, पिस्ता और चमचम सहित कई मिठाइयों में फंगस मिलने की जानकारी सामने आई। खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप न पाए जाने वाले इन खाद्य पदार्थों को बिक्री से हटवाकर नष्ट करवा दिया गया।
19 खाद्य पदार्थों के सैंपल जांच के लिए भेजे
निरीक्षण अभियान के दौरान विभाग की टीम ने कुल 19 खाद्य पदार्थों के नमूने भी एकत्रित किए। इनमें बर्फी, पनीर, बेसन, आटा लड्डू, पंजेरी लड्डू, सूखा पेठा, सोन पापड़ी, चमचम, कलाकंद, मिल्क केक, मीठा बूर और नारियल बर्फी सहित अन्य खाद्य पदार्थ शामिल हैं।
सभी नमूनों को प्रयोगशाला में गुणवत्ता की जांच के लिए भेजा जाएगा। जांच रिपोर्ट में खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन सामने आने पर संबंधित दुकानदारों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
दुकानदारों को साफ-सफाई बनाए रखने की हिदायत
त्योहारी सीजन में मिठाइयों की बिक्री बढ़ने के साथ ही खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और स्वच्छता बनाए रखना भी जरूरी है। विभाग ने दुकानदारों को मिठाइयों के उचित भंडारण, ताजगी और साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए हैं।
वहीं, इस कार्रवाई के बाद उपभोक्ताओं को भी मिठाई खरीदते समय सतर्क रहने की जरूरत है। खुली जगह पर रखी, बासी या फंगस लगी मिठाइयों को खरीदने से बचना चाहिए। खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता से किसी भी तरह का समझौता लोगों की सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
