पंचकूला के स्कूल में मासूम पर बेरहमी से हमला, 8 साल के छात्र का फ्री फायर गेम से जुड़ा चौंकाने वाला खुलासा
क्लासरूम में पढ़ाई करने पहुंची KG की बच्ची पर तीसरी कक्षा के छात्र ने ईंट से किए कई वार, करीब 36 घंटे बाद आया होश
पंचकूला। स्कूल की कक्षा में पढ़ने आई एक मासूम बच्ची के साथ ऐसी हिंसक घटना हुई, जिसने अभिभावकों और शिक्षा जगत को चिंता में डाल दिया है। तीसरी कक्षा में पढ़ने वाले महज आठ साल के छात्र ने केजी की बच्ची पर लात-घूंसों और ईंट से हमला कर उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया। मामले में अब खुलासा हुआ है कि आरोपी बच्चा मोबाइल पर हिंसक ऑनलाइन गेम फ्री फायर खेलने का शौकीन था।
पंचकूला के एक सरकारी स्कूल में हुई इस घटना का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है। करीब सवा तीन मिनट के इस वीडियो में दिखाई देता है कि छात्र पहले बच्ची का सिर बेंच पर मारता है। इसके बाद वह उस पर लात-घूंसों से हमला करता है और बाल पकड़कर घसीटता है। हमले के दौरान आरोपी छात्र ने ईंट से भी कई वार किए, जिसके बाद बच्ची अचेत हो गई।
ऑटो चालक के पहुंचने पर सामने आई घटना
बताया जा रहा है कि घटना का पता उस समय चला, जब ऑटो चालक बच्ची को लेने स्कूल पहुंचा। बच्ची की गंभीर हालत देखकर मामले की जानकारी सामने आई और उसे उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। बच्ची को करीब 36 घंटे बाद होश आने की जानकारी दी गई है।
दो अध्यापक निलंबित, पुलिस कर रही जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने स्कूल प्रबंधन और आरोपी छात्र के अभिभावकों से पूछताछ की है। घटना के संबंध में दोनों कक्षा अध्यापकों को निलंबित कर दिया गया है। वहीं, शिक्षा विभाग ने पूरे मामले की जांच के लिए कमेटी गठित की है।
पुलिस आरोपी छात्र के व्यवहार और उसकी पारिवारिक पृष्ठभूमि की भी जांच कर रही है। इसके साथ ही मनोचिकित्सक की राय लेने की बात भी सामने आई है, ताकि बच्चे के व्यवहार और इस तरह की हिंसक प्रतिक्रिया के संभावित कारणों को समझा जा सके।
बच्चों पर ऑनलाइन गेमिंग के प्रभाव को लेकर फिर उठे सवाल
इस घटना के बाद बच्चों में हिंसक ऑनलाइन गेम्स के बढ़ते प्रभाव को लेकर बहस तेज हो गई है। विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ हिंसक गेम्स का अत्यधिक और बिना निगरानी इस्तेमाल बच्चों के व्यवहार, भावनात्मक नियंत्रण और आक्रामकता पर असर डाल सकता है। हालांकि, केवल किसी गेम को खेलने के आधार पर किसी बच्चे के हिंसक व्यवहार का कारण तय नहीं किया जा सकता।
यह घटना अभिभावकों और स्कूलों के लिए भी एक गंभीर चेतावनी है कि बच्चों की मोबाइल गतिविधियों, ऑनलाइन गेमिंग और व्यवहार में आने वाले बदलावों पर ध्यान देना कितना जरूरी है। साथ ही स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को लेकर भी कई सवाल खड़े हो गए हैं।
