हिमाचल: कम रिजल्ट पर 24 शिक्षकों की वेतनवृद्धि रोकी, शिक्षा विभाग की सख्ती से मचा हड़कंप
हिमाचल प्रदेश में बोर्ड परीक्षाओं में कमजोर प्रदर्शन करने वाले शिक्षकों पर शिक्षा विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है। दसवीं और बारहवीं के खराब परीक्षा परिणामों पर 24 शिक्षकों की वार्षिक वेतनवृद्धि रोक दी गई है।
शिमला। हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों के परीक्षा परिणामों को लेकर शिक्षकों की जवाबदेही तय की जा रही है। स्कूल शिक्षा निदेशालय ने बोर्ड परीक्षाओं के परिणामों की समीक्षा के बाद 18 टीजीटी और छह प्रवक्ताओं के खिलाफ कार्रवाई की है। इन शिक्षकों की वार्षिक वेतनवृद्धि रोकने का फैसला उनके जवाब संतोषजनक नहीं पाए जाने के बाद लिया गया।
जानकारी के अनुसार, शिक्षा निदेशालय ने दसवीं और बारहवीं कक्षा के बोर्ड परीक्षा परिणामों का स्कूल और विषयवार विश्लेषण किया था। इस दौरान जिन शिक्षकों के विषयों में परीक्षा परिणाम 25 फीसदी से कम रहा, उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किए गए थे। ऐसे कुल 50 शिक्षकों से जवाब मांगा गया था।
निदेशालय की ओर से प्राप्त जवाबों की समीक्षा के बाद 24 शिक्षकों के स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाए गए। इसके बाद 18 टीजीटी और छह प्रवक्ताओं की वार्षिक वेतनवृद्धि रोकने की कार्रवाई की गई।
कमजोर परीक्षा परिणाम वाले स्कूलों पर नजर
शिक्षा विभाग अब सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों के शैक्षणिक प्रदर्शन को लेकर गंभीरता दिखा रहा है। परीक्षा परिणामों की समीक्षा के दौरान केवल अंकों पर ही नहीं, बल्कि स्कूलों में शिक्षण व्यवस्था और शैक्षणिक गतिविधियों पर भी ध्यान दिया जा रहा है। जिन स्कूलों का प्रदर्शन कमजोर रहा है, वहां संबंधित विषयों के परिणामों और शिक्षण व्यवस्था की समीक्षा की गई है।
अन्य शिक्षकों पर भी हो सकती है कार्रवाई
शिक्षा निदेशालय की इस कार्रवाई को कमजोर परीक्षा परिणाम देने वाले शिक्षकों के लिए कड़े संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। निदेशालय की ओर से आगामी दिनों में अन्य शिक्षकों के मामलों की भी समीक्षा की जा सकती है। ऐसे में बोर्ड परीक्षाओं में कम परिणाम देने वाले शिक्षकों पर विभाग की निगरानी और सख्त होने की संभावना है।
शिक्षा विभाग की इस पहल का उद्देश्य सरकारी स्कूलों में पढ़ाई की गुणवत्ता सुधारना और विद्यार्थियों के परीक्षा परिणाम बेहतर बनाने के लिए शिक्षकों की जिम्मेदारी सुनिश्चित करना है।
