हिमाचल: मेडिकल कॉलेजों में 2 नवंबर से डॉक्टरों की पेन डाउन हड़ताल, स्टाफ शिफ्टिंग का विरोध
शिमला। हिमाचल प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में 2 नवंबर से डॉक्टरों का आंदोलन शुरू होने जा रहा है। स्टाफ की शिफ्टिंग और सेवा शर्तों से जुड़े मुद्दों को लेकर मेडिकल शिक्षक तीन दिन तक पेन डाउन स्ट्राइक करेंगे, जिससे ओपीडी समेत गैर-आपातकालीन सेवाएं प्रभावित होने की आशंका है।
हिमाचल प्रदेश में स्टेट एसोसिएशन ऑफ मेडिकल एंड डेंटल कॉलेज टीचर्स (सेमडीकोट) ने प्रदेश सरकार के खिलाफ चरणबद्ध आंदोलन का ऐलान किया है। एसोसिएशन ने 2 से 4 नवंबर तक पेन डाउन स्ट्राइक करने का निर्णय लिया है। वहीं, मांगों पर बातचीत नहीं होने की स्थिति में 5 नवंबर को सामूहिक आकस्मिक अवकाश लेकर सचिवालय तक मार्च निकालने की चेतावनी दी है।
सेमडीकोट की बुधवार को आयोजित आपातकालीन जनरल बॉडी मीटिंग में आंदोलन शुरू करने का फैसला सर्वसम्मति से लिया गया। एसोसिएशन का आरोप है कि प्रदेश सरकार की ओर से मेडिकल फैकल्टी को लेकर हाल ही में जारी कुछ आदेश मनमाने और भेदभावपूर्ण हैं। शिक्षकों का कहना है कि उनकी सेवा शर्तों से संबंधित समस्याओं और लंबे समय से लंबित मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं की जा रही है।
सुबह 9:30 से 11 बजे तक होगी पेन डाउन स्ट्राइक
आंदोलन के पहले चरण में 2, 3 और 4 नवंबर को प्रदेश के संबंधित विभागों में मेडिकल शिक्षक सुबह 9:30 से 11:00 बजे तक पेन डाउन स्ट्राइक करेंगे। इस दौरान नियमित शैक्षणिक कार्यों और गैर-आपातकालीन सेवाओं पर असर पड़ सकता है।
हालांकि, एसोसिएशन ने स्पष्ट किया है कि मरीजों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए आपातकालीन सेवाएं, ट्रॉमा केयर और आईसीयू पहले की तरह संचालित रहेंगे।
5 नवंबर को सामूहिक अवकाश और सचिवालय मार्च की चेतावनी
सेमडीकोट के अनुसार, यदि 4 नवंबर तक सरकार ने मांगों पर बातचीत नहीं की और विवादित आदेशों को वापस लेने की दिशा में कदम नहीं उठाया, तो 5 नवंबर को संबंधित शिक्षक सामूहिक आकस्मिक अवकाश पर रहेंगे। इसके साथ ही सचिवालय तक मार्च निकालकर विरोध दर्ज करवाया जाएगा।
एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. बलबीर एस. वर्मा और महासचिव डॉ. पीयूष कपिला ने बताया कि आंदोलन को लेकर संबंधित अधिकारियों को औपचारिक सूचना दे दी गई है। इस संबंध में इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) के प्राचार्य को भी नोटिस सौंपा गया है, ताकि मामला चिकित्सा शिक्षा विभाग और प्रदेश सरकार तक पहुंचाया जा सके।
एसोसिएशन पदाधिकारियों ने ओपीडी में आने वाले मरीजों को संभावित असुविधा के लिए खेद जताया। उनका कहना है कि शिक्षकों के अधिकारों और चिकित्सा संस्थानों की गरिमा से जुड़े मुद्दों की अनदेखी के चलते उन्हें लोकतांत्रिक तरीके से विरोध का रास्ता अपनाना पड़ा है।
ऐसे में आगामी दिनों में सरकार और सेमडीकोट के बीच बातचीत का रुख महत्वपूर्ण रहेगा। यदि सहमति नहीं बनती है, तो 5 नवंबर को आंदोलन के अगले चरण का असर देखने को मिल सकता है।
