सिरमौर: आरक्षण के मुद्दे पर मंत्री अनिरुद्ध सिंह को घेरा, शोषण मुक्ति मंच ने सरकार से मांगा जवाब
आरक्षण विरोधी राजनीति को संरक्षण देने का आरोप, वंचित वर्गों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा की उठाई मांग
नाहन (सिरमौर)। हिमाचल प्रदेश में आरक्षण और सामाजिक न्याय के मुद्दे पर राजनीतिक बहस के बीच शोषण मुक्ति मंच ने मंत्री अनिरुद्ध सिंह के कथित रुख पर सवाल उठाए हैं। मंच ने आरोप लगाया कि आरक्षण विरोधी गतिविधियों को समर्थन देना संविधान की भावना के विपरीत है। साथ ही सरकार से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।
मंच के राज्य संयोजक आशीष कुमार ने कहा कि आरक्षण का उद्देश्य समाज में लंबे समय से चली आ रही असमानताओं को दूर करना और वंचित समुदायों को समान अवसर उपलब्ध करवाना है। उन्होंने मंत्री अनिरुद्ध सिंह से इस मुद्दे पर अपना पक्ष स्पष्ट करने की मांग की। उनका कहना है कि सामाजिक न्याय और वंचित वर्गों के अधिकारों की रक्षा कांग्रेस की घोषित राजनीतिक प्रतिबद्धताओं का हिस्सा रही है, इसलिए सरकार को भी अपनी स्थिति साफ करनी चाहिए।
संवैधानिक अधिकारों की रक्षा पर जोर
आशीष कुमार ने संविधान के अनुच्छेद 14, 15(4), 16(4), 17, 38 और 46 का उल्लेख करते हुए कहा कि ये प्रावधान समानता, सामाजिक न्याय और वंचित वर्गों के संरक्षण की भावना को मजबूत करते हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी समुदाय को अपनी मांगों के समर्थन में आवाज उठाने का अधिकार है, लेकिन एक वर्ग के हितों की बात करते हुए दूसरे वर्गों के संवैधानिक अधिकारों को कमजोर नहीं किया जाना चाहिए।
मंच ने सरकार से सामाजिक समानता और सभी वर्गों के लिए अवसर सुनिश्चित करने के उद्देश्य से प्रभावी कदम उठाने की अपील की। साथ ही आरक्षण के खिलाफ माहौल बनाने वाली गतिविधियों को राजनीतिक संरक्षण नहीं देने की मांग भी उठाई।
सचिवालय के बाहर हुए घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच की मांग
शोषण मुक्ति मंच ने सचिवालय के बाहर हुए घटनाक्रम का जिक्र करते हुए कहा कि यदि सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, पुलिस पर पथराव करने या कानून-व्यवस्था प्रभावित करने जैसी घटनाएं हुई हैं, तो उनकी निष्पक्ष जांच करवाई जानी चाहिए। मंच ने स्पष्ट किया कि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई साक्ष्यों के आधार पर और कानून के दायरे में रहकर होनी चाहिए।
मंच के नेताओं ने कहा कि कानून का पालन सभी के लिए समान रूप से लागू होना चाहिए और किसी भी व्यक्ति को राजनीतिक प्रभाव के कारण विशेष छूट नहीं मिलनी चाहिए।
लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रखने की बात
शोषण मुक्ति मंच और दलित शोषण मुक्ति मंच ने सरकार से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के अधिकारों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की मांग दोहराई। मंच ने कहा कि सामाजिक न्याय और संवैधानिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर वह लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाता रहेगा।
