हिमाचल में दवा उद्योग पर सख्ती: 96 इकाइयों में उत्पादन बंद, 92 दवा सैंपल गुणवत्ता जांच में फेल
सोलन। हिमाचल प्रदेश में दवाओं की गुणवत्ता को लेकर औषधि नियंत्रक प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। प्रदेश की 96 दवा विनिर्माण इकाइयों में पूरी फैक्टरी या कुछ विशेष सेक्शन में उत्पादन पर रोक लगाई गई है, जबकि सितंबर के ड्रग अलर्ट में हिमाचल के निर्माताओं से संबंधित 92 दवा सैंपल गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे।
औषधि नियंत्रक प्रशासन ने मरीजों और आम जनता से अपील की है कि ड्रग अलर्ट में मानक गुणवत्ता से कम घोषित की गई दवाओं के संबंधित बैच का इस्तेमाल न करें। प्रशासन का कहना है कि दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए नियमों के तहत कार्रवाई की जा रही है।
हिमाचल से जुड़े 92 सैंपल जांच में फेल
केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) की ओर से जारी सितंबर माह के ड्रग अलर्ट में देशभर के कुल 330 दवा सैंपल गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे। इनमें से 92 सैंपल हिमाचल प्रदेश में दवा निर्माताओं से संबंधित हैं।
ड्रग कंट्रोल एडमिनिस्ट्रेशन के मुताबिक, इन 92 सैंपलों में से 70 में दवाओं की मात्रा और घुलने की क्षमता जैसे महत्वपूर्ण गुणवत्ता मानकों में कमी पाई गई। वहीं, 22 सैंपलों में लेबलिंग समेत अन्य छोटी खामियां सामने आईं।
सुधारात्मक कार्रवाई के सत्यापन तक निर्माण पर रोक
राज्य औषधि नियंत्रक डॉ. मनीष कपूर ने बताया कि जिन दवा कंपनियों के उत्पाद निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरते, उन्हें सुधारात्मक और निवारक कार्रवाई के सत्यापन तक दवाओं का निर्माण करने की अनुमति नहीं दी जाती।
उन्होंने स्पष्ट किया कि संबंधित मामलों में कानून के प्रावधानों के अनुसार विनिर्माण लाइसेंस निलंबित करने या रद्द करने की कार्रवाई भी की जाती है। प्रदेश में फिलहाल 96 दवा विनिर्माण इकाइयों की पूरी फैक्टरी या विशिष्ट सेक्शन में उत्पादन बंद रखने के निर्देश लागू हैं।
दवा निर्माण और वितरण पर जीरो टॉलरेंस
डॉ. कपूर के अनुसार, जिन क्षेत्रों से दवाओं के नमूने एकत्र कर जांच के लिए भेजे जाते हैं, वहां के संबंधित अधिकारियों द्वारा भी नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाती है।
औषधि नियंत्रक प्रशासन ने घटिया गुणवत्ता वाली दवाओं के निर्माण और वितरण के मामलों में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने की बात कही है।
मरीजों के लिए क्या है सलाह?
प्रशासन ने लोगों से ड्रग अलर्ट में घोषित मानक गुणवत्ता से कम दवाओं के संबंधित बैच का इस्तेमाल न करने की अपील की है। यदि किसी दवा का बैच अलर्ट में शामिल है, तो मरीज उसके उपयोग को लेकर डॉक्टर या फार्मासिस्ट से सलाह लें और अपने स्तर पर जरूरी दवा बंद करने के बजाय चिकित्सकीय मार्गदर्शन प्राप्त करें।
दवाओं की गुणवत्ता की निगरानी का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मरीजों तक निर्धारित मानकों के अनुरूप दवाएं पहुंचें और नियमों का उल्लंघन करने वाली इकाइयों के खिलाफ उचित कार्रवाई हो।
