
नौहराधार सीएचसी में दो दिन में दो बार गिरी छत, कर्मचारी घायल; महिला डॉक्टर बाल-बाल बचीं
19 अक्टूबर की रात कर्मचारी के पांव पर गिरा छत का मलबा, 21 अक्टूबर को महिला चिकित्सक के कमरे में भरभराकर गिरी फॉल्स सीलिंग और प्लास्टर की परत
नौहराधार (सिरमौर)। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) नौहराधार के जर्जर भवन में दो दिन के भीतर छत गिरने की दो घटनाएं सामने आई हैं। 19 अक्टूबर की रात ड्यूटी पर तैनात चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी छत से गिरी सीमेंट की भारी परत की चपेट में आकर घायल हो गया, जबकि 21 अक्टूबर को महिला चिकित्सक के कमरे में फॉल्स सीलिंग और प्लास्टर का बड़ा हिस्सा गिर गया। गनीमत रही कि दूसरी घटना में डॉक्टर बाल-बाल बच गईं। लगातार हो रहे इन हादसों ने अस्पताल के पुराने भवन की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सोते समय कर्मचारी के पांव पर गिरा मलबा
जानकारी के अनुसार, पहला हादसा 19 अक्टूबर की रात करीब 11 बजे हुआ। उस समय चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी नरेश कुमार रात की ड्यूटी पर तैनात थे और ओपीडी में सो रहे थे। इसी दौरान जर्जर छत से सीमेंट की भारी परत टूटकर उनके पांव पर गिर गई। राहत की बात यह रही कि मलबा उनके सिर पर नहीं गिरा, अन्यथा बड़ा हादसा हो सकता था।
घटना के बाद नरेश कुमार को पांव में चोट लगी। बताया गया कि घायल होने के बावजूद वह पूरी रात दर्द से परेशान होकर ओपीडी में बैठे रहे। मौके पर मौजूद डॉक्टर और स्टाफ नर्स ने उन्हें प्राथमिक उपचार दिया। इसी रात अस्पताल की लैब और दंत चिकित्सालय की छत से भी सीमेंट की परतें गिरने की जानकारी सामने आई।
डॉक्टर के कमरे में गिरी फॉल्स सीलिंग
दूसरी घटना 21 अक्टूबर को दिन के समय हुई। महिला चिकित्सक डॉ. सिम्मी अपने कक्ष में बैठी थीं, तभी अचानक फॉल्स सीलिंग और प्लास्टर का बड़ा हिस्सा भरभराकर नीचे गिर गया। मलबा सीधे टेबल और कुर्सी पर जा गिरा। घटना के समय डॉक्टर कमरे में मौजूद थीं, लेकिन संयोगवश उन्हें चोट नहीं आई।
दो दिनों के भीतर हुई इन घटनाओं से अस्पताल के कर्मचारियों में डर का माहौल है। पुराने भवन में छत की खराब स्थिति को देखते हुए यहां काम करने वाले कर्मचारियों और उपचार के लिए आने वाले मरीजों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई है।
नया 30 बिस्तरों वाला भवन तैयार, शिफ्टिंग का इंतजार
हैरानी की बात यह है कि सीएचसी नौहराधार का नया 30 बिस्तरों वाला भवन बनकर तैयार बताया जा रहा है। इसका उद्घाटन 23 सितंबर को प्रस्तावित था, लेकिन कार्यक्रम टाल दिया गया। इसके बावजूद अस्पताल का संचालन पुराने भवन में ही हो रहा है।
बताया जा रहा है कि नए भवन में अभी एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड जैसी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में नए भवन में अस्पताल को स्थानांतरित करने की प्रक्रिया में देरी की वजह और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध करवाने की स्थिति को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
कर्मचारियों और मरीजों की सुरक्षा पर सवाल
लगातार दो हादसों के बाद स्थानीय लोगों के बीच यह सवाल चर्चा में है कि जब नया भवन तैयार है, तो अस्पताल को वहां स्थानांतरित करने में देरी क्यों हो रही है? वहीं, जब तक पुराने भवन में स्वास्थ्य सेवाएं जारी हैं, तब तक वहां कार्यरत कर्मचारियों, डॉक्टरों और उपचार के लिए पहुंचने वाले मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी किसकी है?
अब देखना होगा कि संबंधित विभाग पुराने भवन की स्थिति का आकलन कर सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाता है और नए भवन में अस्पताल की शिफ्टिंग को लेकर कब तक निर्णय लिया जाता है।
