नाहन में 25 अक्तूबर को जुटेंगे स्वास्थ्य विभाग के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, सात जिलों के अविश्वास प्रस्ताव पर होगा फैसला
राज्य स्तरीय कर्मचारी संगठन में चल रहे मतभेदों को सुलझाने की कोशिश, बैठक में नई कार्यकारिणी के गठन और चुनाव पर भी हो सकता है विचार
नाहन (सिरमौर)। स्वास्थ्य विभाग के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के संगठन में चल रहे विवाद को सुलझाने के लिए 25 अक्तूबर को नाहन में अहम बैठक होने जा रही है। सात जिलों के जिला प्रधानों की ओर से राज्य स्तरीय संघ के खिलाफ उठाए गए सवालों और अविश्वास प्रस्ताव के बाद अब सभी पक्षों को एक मंच पर लाकर संगठन की भावी दिशा तय करने की कोशिश की जाएगी।
डॉ. वाई.एस. परमार मैडीकल कॉलेज एवं अस्पताल नाहन में आयोजित होने वाली इस बैठक को कर्मचारी एकता मंच, स्वास्थ्य विभाग चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी हिमाचल प्रदेश की ओर से बुलाया गया है। मंच के अनुसार, बैठक में प्रदेश के विभिन्न जिलों के प्रधान और पदाधिकारी शामिल होंगे। इस दौरान संगठन की कार्यप्रणाली, जिला इकाइयों के साथ समन्वय और कर्मचारियों के हितों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की जाएगी।
धर्मशाला में उठ चुका है अविश्वास प्रस्ताव का मुद्दा
कर्मचारी एकता मंच के अध्यक्ष विनय राजपूत और सचिव त्रिलोक कपूर के अनुसार, बीते अगस्त में सात जिलों के जिला प्रधानों ने राज्य स्तरीय युवा चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी संघ, स्वास्थ्य विभाग, हिमाचल प्रदेश की कार्यप्रणाली पर असंतोष जताया था। इस संबंध में धर्मशाला में प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से अविश्वास प्रस्ताव सामने रखा गया था।
मंच का कहना है कि इसके बाद भी विवाद का संतोषजनक समाधान नहीं हो पाया है। जिला प्रधानों और राज्य स्तरीय नेतृत्व के बीच समन्वय की कमी का मुद्दा भी उठाया गया है। ऐसे में 25 अक्तूबर की बैठक को संगठन के भीतर चल रहे मतभेद दूर करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
दूसरे कर्मचारी महासंघ को भी बुलाया
मंच के पदाधिकारियों के मुताबिक, बैठक में राज्य स्तरीय युवा चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी संघ के साथ वर्ष 2017 से कार्यरत राज्य स्तरीय स्वास्थ्य विभाग चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी महासंघ को भी आमंत्रित किया गया है। उद्देश्य यह है कि सभी संबंधित संगठनों और जिला प्रतिनिधियों के बीच बातचीत हो तथा कर्मचारियों के हितों को लेकर साझा रणनीति बनाई जा सके।
बैठक में शामिल नहीं हुआ संघ तो चुनाव का विकल्प
कर्मचारी एकता मंच ने स्पष्ट किया है कि यदि राज्य स्तरीय संघ बैठक में हिस्सा नहीं लेता है, तो सभी जिला प्रधानों की सहमति से मौजूदा कार्यकारिणी को भंग करने और नए चुनाव करवाने पर निर्णय लिया जा सकता है। इसके बाद नई कार्यकारिणी के गठन की प्रक्रिया भी शुरू की जा सकती है।
मंच के अनुसार, संगठन में पारदर्शिता, बेहतर तालमेल और कर्मचारियों की समस्याओं को प्राथमिकता देना जरूरी है। इसी उद्देश्य से प्रदेश के सभी जिला प्रधानों और पदाधिकारियों से 25 अक्तूबर की बैठक में भाग लेने की अपील की गई है।
अब सभी की नजरें नाहन में होने वाली इस बैठक पर रहेंगी, जहां यह स्पष्ट हो सकेगा कि संगठन के भीतर जारी मतभेद बातचीत से सुलझते हैं या नई कार्यकारिणी के गठन और चुनाव की दिशा में कदम बढ़ाया जाता है।
