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42 साल पुराने ठगी के मामले में नाहन से गिरफ्तारी, खिलाड़ी बनकर चौगान मैदान पहुंची राजस्थान पुलिस
नाहन के चौगान मैदान में फुटबॉल कोच की तलाश में पहुंची पुलिस ने अपनाया अलग तरीका, 1984 के धोखाधड़ी मामले में घोषित था उद्घोषित अपराधी।
नाहन (सिरमौर)। हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के नाहन में लंबे समय से कोच के रूप में पहचान बना चुके 69 वर्षीय विजय कुमार यादव को राजस्थान पुलिस ने गिरफ्तार किया है। उदयपुर पुलिस को उसकी तलाश वर्ष 1984 में दर्ज धोखाधड़ी के एक मामले में थी। पुलिस के अनुसार, आरोपी को काफी समय पहले उद्घोषित अपराधी घोषित किया गया था।
आरोपी तक पहुंचने के लिए राजस्थान पुलिस ने खास रणनीति अपनाई। पुलिस टीम के सदस्य खिलाड़ी बनकर नाहन के चौगान मैदान पहुंचे और वहां कोच से संपर्क किया। बातचीत के दौरान पहचान की पुष्टि होने पर उसे गिरफ्तार कर लिया गया। इस कार्रवाई में सिरमौर पुलिस ने भी सहयोग किया।
सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर वसूले थे पैसे
पुलिस के मुताबिक, इस मामले की शुरुआत 5 मार्च 1984 को हुई थी। उदयपुर के धनमंडी पुलिस थाने में भंवर सिंह नामक व्यक्ति ने शिकायत दर्ज करवाई थी। शिकायत में विजय कुमार यादव और उसके साथियों पर कथित तौर पर लोगों को सरकारी नौकरी दिलाने का भरोसा देकर पैसे ऐंठने के आरोप लगाए गए थे।
आरोप था कि संबंधित लोगों ने ‘किनारा ग्रुप’ और ‘अग्रवाल सेल्स’ के नाम से संस्थाएं संचालित कीं और केंद्र सरकार से स्वीकृति प्राप्त होने का दावा किया। बेरोजगार लोगों को नौकरी का आश्वासन देकर प्रत्येक व्यक्ति से 3,000 रुपये वसूले गए। शिकायत के अनुसार, इस तरीके से करीब 32,000 रुपये एकत्र किए गए। इसके बाद कार्यालय बंद कर आरोपी फरार हो गए।
इस मामले में पुलिस ने अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था, लेकिन विजय कुमार यादव लंबे समय तक पकड़ में नहीं आया। बाद में उसे उद्घोषित अपराधी घोषित कर दिया गया।
नाहन में कोच के रूप में बना ली थी पहचान
जानकारी के अनुसार, विजय कुमार यादव हरियाणा के भिवानी जिले के रूपगढ़ का मूल निवासी है। वह लंबे समय से अपने परिवार के साथ नाहन में रह रहा था। उसने जवाहर नवोदय विद्यालय में फुटबॉल कोच के तौर पर सेवाएं दीं और वर्ष 2018 में सेवानिवृत्त हो गया। सेवानिवृत्ति के बाद भी वह स्थानीय क्लबों के साथ एथलेटिक्स कोच के रूप में जुड़ा रहा।
इस दौरान वह नाहन में खेल गतिविधियों से जुड़ा रहा, जबकि राजस्थान पुलिस वर्ष 1984 के मामले में उसकी तलाश कर रही थी।
तकनीकी जांच और पुराने संपर्कों से मिला सुराग
राजस्थान पुलिस के अनुसार, आरोपी का पता लगाने के लिए तकनीकी जांच के साथ-साथ मैनुअल पड़ताल भी की गई। उसके पैतृक गांव में पारिवारिक संपर्कों के माध्यम से मिले सुरागों ने जांच को आगे बढ़ाने में मदद की। इसके बाद उदयपुर पुलिस की टीम नाहन पहुंची और स्थानीय पुलिस के सहयोग से गिरफ्तारी को अंजाम दिया।
एसपी सिरमौर एनएस नेगी ने गिरफ्तारी की पुष्टि की है। आरोपी के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई राजस्थान पुलिस द्वारा की जा रही है। मामले में लगाए गए आरोपों पर अंतिम फैसला न्यायालय की प्रक्रिया के तहत होगा।
