सिरमौर में 89 आयुष संस्थानों से मिल रहीं स्वास्थ्य सेवाएं, पंचकर्म से उपचार के साथ युवाओं को प्रशिक्षण के अवसर
पंचकर्म चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार से पारंपरिक आयुर्वेदिक उपचार को मिल रहा बढ़ावा, एक वर्षीय टेक्नीशियन कोर्स से कौशल विकास पर जोर
नाहन (सिरमौर)। सिरमौर जिले में आयुष स्वास्थ्य सेवाओं के नेटवर्क के माध्यम से लोगों को स्थानीय स्तर पर आयुर्वेदिक उपचार की सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा रही हैं। जिले के 89 आयुष संस्थानों में पंचकर्म सहित विभिन्न पारंपरिक चिकित्सा प्रक्रियाओं की सुविधा उपलब्ध होने से जहां लोगों को उपचार के विकल्प मिल रहे हैं, वहीं पंचकर्म टेक्नीशियन प्रशिक्षण के जरिए युवाओं के कौशल विकास और रोजगार की संभावनाओं को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
जिला आयुष अस्पताल नाहन के वरिष्ठ चिकित्सक विशेषज्ञ डॉ. नरेश चौहान (BAMS, MD पंचकर्म) के अनुसार, पंचकर्म आयुर्वेद की पारंपरिक चिकित्सा पद्धति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके अंतर्गत रोगी की स्वास्थ्य स्थिति और चिकित्सकीय आवश्यकता के अनुसार विभिन्न प्रक्रियाओं का चयन किया जाता है। उन्होंने बताया कि आयुष स्वास्थ्य सेवाओं का उद्देश्य लोगों को उपचार उपलब्ध करवाने के साथ स्वास्थ्य संवर्धन और स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूक करना भी है।
सिरमौर में 89 संस्थानों के माध्यम से आयुष सेवाएं
जिला सिरमौर में आयुष स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तृत नेटवर्क कार्यरत है। जिले में कुल 89 संस्थानों के माध्यम से लोगों को सेवाएं प्रदान की जा रही हैं। इनमें 72 आयुष्मान आरोग्य संस्थान, 15 आयुर्वेदिक स्वास्थ्य केंद्र और दो आयुर्वेदिक अस्पताल शामिल हैं।
इन संस्थानों में उपलब्ध सुविधाओं और चिकित्सकीय संसाधनों के अनुसार लोगों को आयुर्वेदिक उपचार तथा चयनित पंचकर्म प्रक्रियाओं का लाभ दिया जा रहा है। इससे जिले के विभिन्न क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को स्थानीय स्तर पर पारंपरिक चिकित्सा सुविधाओं तक पहुंच बनाने में सहायता मिल रही है।
पंचकर्म की विभिन्न प्रक्रियाओं से उपचार की सुविधा
डॉ. नरेश चौहान के अनुसार, संबंधित संस्थानों में उपलब्ध सुविधाओं के आधार पर शिरोधारा, जानु बस्ती, ग्रीवा बस्ती, कटि बस्ती, नस्य कर्म, स्नेहन, स्वेदन, अग्निकर्म, रक्तमोक्षण, मर्म चिकित्सा और योनि पिचू जैसी विभिन्न आयुर्वेदिक प्रक्रियाएं की जाती हैं।
पारंपरिक रूप से कुछ प्रक्रियाओं का उपयोग दर्द और अकड़न जैसी समस्याओं के प्रबंधन में किया जाता है। उदाहरण के तौर पर, जानु बस्ती का उपयोग घुटनों से संबंधित कुछ समस्याओं में, जबकि ग्रीवा बस्ती और कटि बस्ती का उपयोग गर्दन तथा कमर से जुड़ी चुनिंदा समस्याओं में किया जाता है। वहीं, शिरोधारा और अभ्यंग जैसी प्रक्रियाएं कुछ लोगों को विश्राम प्रदान करने में सहायक हो सकती हैं।
हालांकि, इन प्रक्रियाओं का प्रभाव प्रत्येक व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। इसलिए किसी भी पंचकर्म प्रक्रिया को अपनाने से पहले योग्य चिकित्सक से परामर्श और आवश्यक चिकित्सकीय जांच कराना जरूरी है।
पंचकर्म उपचार से लाभार्थियों ने साझा किए अनुभव
नाहन के गुन्नू घाट निवासी रंजीत सिंह ने बताया कि घुटनों में दर्द की समस्या के चलते वह जिला आयुर्वेदिक अस्पताल नाहन पहुंचे थे, जहां उन्हें पंचकर्म चिकित्सा की सुविधा मिली। उनके अनुसार, उपचार के बाद उन्हें आराम और सुकून महसूस हुआ तथा शरीर में हल्कापन भी लगा।
रंजीत सिंह ने जिला मुख्यालय में पंचकर्म जैसी पारंपरिक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध होने पर प्रसन्नता जताई। उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर ऐसी सुविधाएं मिलने से लोगों को अपने क्षेत्र में ही उपचार प्राप्त करने का अवसर मिलता है।
इसी प्रकार, नाहन निवासी सुनीधि अग्रवाल ने सिरदर्द और चक्कर आने की समस्या के चलते जिला आयुर्वेदिक अस्पताल में शिरोधारा प्रक्रिया करवाई। उन्होंने अपने अनुभव के आधार पर बताया कि उपचार के दूसरे दिन उन्हें विश्राम महसूस हुआ और सिरदर्द में कुछ अंतर नजर आया।
दोनों लाभार्थियों के अनुभव उनके व्यक्तिगत हैं। सिरदर्द, चक्कर या लगातार दर्द जैसी समस्याओं में उचित चिकित्सकीय जांच आवश्यक है और किसी भी पारंपरिक प्रक्रिया को आवश्यक चिकित्सा का विकल्प नहीं मानना चाहिए।
एक वर्षीय पंचकर्म टेक्नीशियन कोर्स से युवाओं को प्रशिक्षण
आयुष सेवाओं के विस्तार के साथ-साथ युवाओं को इस क्षेत्र में प्रशिक्षित करने पर भी जोर दिया जा रहा है। इसी क्रम में पच्छाद विधानसभा क्षेत्र के क्वाकधार गांव की लवली तथा नाहन विधानसभा क्षेत्र के बनेठी गांव की कृतिका पुंडीर और स्नेहा ठाकुर एक वर्षीय पंचकर्म टेक्नीशियन कोर्स कर रही हैं।
इस पाठ्यक्रम के माध्यम से प्रशिक्षुओं को पंचकर्म से संबंधित प्रक्रियाओं का व्यावहारिक ज्ञान हासिल करने और आयुष स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े क्षेत्र में अपनी कार्यकुशलता विकसित करने का अवसर मिल रहा है। ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम पारंपरिक चिकित्सा संस्थानों के लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करने में सहायक हो सकते हैं।
प्रशिक्षु लवली, कृतिका पुंडीर और स्नेहा ठाकुर ने इस प्रशिक्षण अवसर के लिए प्रदेश सरकार का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पाठ्यक्रम के माध्यम से उन्हें नया कौशल सीखने और भविष्य में आयुष एवं पंचकर्म के क्षेत्र में रोजगार की संभावनाएं तलाशने का अवसर मिल रहा है।
स्वास्थ्य सेवाओं के साथ रोगी सुरक्षा भी जरूरी
जिले में आयुष संस्थानों का नेटवर्क स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। पंचकर्म जैसी प्रक्रियाओं और प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से पारंपरिक चिकित्सा सेवाओं को आगे बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
डॉ. नरेश चौहान के अनुसार, आयुर्वेदिक उपचार का चयन रोगी की स्वास्थ्य स्थिति और चिकित्सकीय आवश्यकता को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए। उपचार के दौरान स्वच्छता, प्रशिक्षित कर्मचारियों की उपलब्धता और उचित चिकित्सकीय निगरानी का विशेष महत्व है।
कुल मिलाकर, सिरमौर जिले में आयुष सेवाओं का विस्तार और पंचकर्म टेक्नीशियन प्रशिक्षण लोगों को पारंपरिक चिकित्सा सुविधाओं तक पहुंच उपलब्ध कराने के साथ युवाओं को व्यावसायिक कौशल विकसित करने के अवसर प्रदान कर रहा है।
