नाहन: रामपुर माजरी में प्रदूषण से 7-8 गांवों पर संकट! ग्रामीणों ने डीसी से लगाई गुहार, आंदोलन की चेतावनी
धुएं और दूषित पानी से हजारों लोगों के स्वास्थ्य पर खतरे की आशंका, ग्रामीणों ने उद्योग के खिलाफ कार्रवाई की उठाई मांग।
बाता नदी तक पहुंच रहा दूषित पानी? ग्रामीणों ने प्रशासन को सौंपा ज्ञापन, जांच कर सख्त कदम उठाने की अपील।
नाहन/पांवटा साहिब (सिरमौर)। रामपुर माजरी क्षेत्र में एक उद्योग से कथित तौर पर फैल रहे प्रदूषण को लेकर ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि उद्योग से निकलने वाला धुआं और दूषित पानी आसपास के सात से आठ गांवों में रहने वाले करीब सात से आठ हजार लोगों के लिए परेशानी का कारण बन रहा है। मामले को लेकर मंगलवार को जय सिंह के नेतृत्व में ग्रामीणों के एक प्रतिनिधिमंडल ने नाहन में उपायुक्त सिरमौर से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा और उद्योग के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
दूषित पानी बाता नदी में मिलने का आरोप
ग्रामीणों ने प्रशासन को बताया कि उद्योग से निकलने वाला दूषित पानी नाले में छोड़ा जा रहा है, जो आगे चलकर बाता नदी में मिलता है। इससे आसपास की कृषि भूमि, फसलों और जलस्रोतों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका जताई गई है। ग्रामीणों के अनुसार, प्रदूषण के कारण क्षेत्र में पर्यावरण और पेयजल की शुद्धता को लेकर भी लोगों की चिंताएं बढ़ रही हैं।
घास और पौधों पर जम रही काली परत
प्रतिनिधिमंडल में शामिल ग्रामीणों का कहना है कि उद्योग से निकलने वाले धुएं के कारण घास और पौधों पर काली परत जम रही है। इससे खेतीबाड़ी के साथ-साथ आम जनजीवन भी प्रभावित हो रहा है। ग्रामीणों ने दावा किया कि क्षेत्र के लोगों को त्वचा और फेफड़ों से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने बच्चों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका जताई और कैंसर समेत गंभीर बीमारियों के संभावित खतरे को लेकर चिंता व्यक्त की।
हालांकि, इन स्वास्थ्य संबंधी दावों और प्रदूषण के प्रभावों की पुष्टि के लिए संबंधित विभागों की जांच तथा वैज्ञानिक आकलन जरूरी है।
कई बार शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं होने का दावा
ग्रामीणों के मुताबिक, संबंधित उद्योग कई वर्षों से क्षेत्र में संचालित है, लेकिन हाल के समय में प्रदूषण की समस्या अधिक गंभीर हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस संबंध में पहले भी कई बार शिकायतें की गईं, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों का कहना है कि धुएं और दूषित पानी की समस्या के चलते आसपास के गांवों में रहने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ रही हैं।
कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी
ज्ञापन सौंपने के बाद मीडिया से बातचीत में ग्रामीणों ने प्रशासन से मामले का गंभीरता से संज्ञान लेने की अपील की। उन्होंने मांग की कि उद्योग से निकलने वाले धुएं और दूषित पानी की निष्पक्ष जांच करवाई जाए, जलस्रोतों और आसपास की कृषि भूमि पर पड़ रहे प्रभावों का आकलन किया जाए तथा नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
प्रतिनिधिमंडल में जय सिंह, टेकचंद, सादिक अली, अशोक सैनी, बाबूराम, सुनील और राहुल सहित अन्य ग्रामीण शामिल रहे। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द उनकी शिकायत पर ठोस कदम नहीं उठाए गए तो वे आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। अब क्षेत्र के लोगों की निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।
