हिमाचल में छात्रवृत्ति का इंतजार लंबा, 38,720 मामले लंबित; 15 दिन में प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश
बैंक खातों में आधार सीडिंग की कमी से हजारों विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति का भुगतान अटका हुआ है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद उच्च शिक्षा निदेशालय ने शिक्षण संस्थानों को 15 दिन की समयसीमा दी है और देरी होने पर जवाबदेही तय करने की चेतावनी दी है।
शिमला। हिमाचल प्रदेश में छात्रवृत्ति का इंतजार कर रहे हजारों विद्यार्थियों की परेशानी बढ़ गई है। प्रदेश के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाओं से जुड़े कुल 38,720 मामले लंबित हैं। भुगतान में देरी की प्रमुख वजह विद्यार्थियों के बैंक खातों में आधार सीडिंग नहीं होना सामने आई है। इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए उच्च शिक्षा निदेशालय ने सभी संबंधित शिक्षण संस्थानों को निर्धारित समय के भीतर प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए हैं।
निर्देशों के अनुसार, संस्थानों को अगले 15 दिनों के भीतर विद्यार्थियों के बैंक खातों में आधार सीडिंग की स्थिति दुरुस्त कर अनुपालन रिपोर्ट सौंपनी होगी। तय समयसीमा में कार्य पूरा नहीं होने पर संस्थान प्रमुखों और संबंधित नोडल अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही तय की जा सकती है।
चार शैक्षणिक सत्रों के मामले लंबित
उच्च शिक्षा निदेशालय के आंकड़ों के मुताबिक, लंबित मामलों में सबसे बड़ी संख्या शैक्षणिक सत्र 2024-25 की है। इस सत्र के 20,120 आवेदन अभी तक लंबित हैं। इसके अलावा शैक्षणिक सत्र 2025-26 के 12,084, वर्ष 2023-24 के 3,654 और वर्ष 2022-23 के 2,862 मामले भुगतान की प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार कर रहे हैं।
इनमें अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के विद्यार्थियों की प्री-मैट्रिक तथा पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति के साथ पीएम-यशस्वी योजना के आवेदन भी शामिल हैं।
पीएम-यशस्वी योजना के हजारों आवेदन भी अटके
आंकड़ों के अनुसार, शैक्षणिक सत्र 2024-25 में पीएम-यशस्वी पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति के 9,694 और प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति के 7,131 मामले लंबित हैं। कई आवेदन संबंधित शिक्षण संस्थानों और राज्य स्तर पर सत्यापित किए जा चुके हैं, लेकिन बैंक खातों में आधार सीडिंग नहीं होने के कारण भुगतान की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है।
राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल पर भी आ रही दिक्कत
छात्रवृत्ति भुगतान से जुड़ी समस्याओं में राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल (एनएसपी) के रिकॉर्ड का मामला भी शामिल है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पोर्टल पर पुराने भुगतान लॉग हटने के कारण रिकॉर्ड से संबंधित दिक्कतें सामने आई हैं। वर्ष 2022-23 के भुगतान की प्रक्रिया प्रतिबंधित होने से एससी विद्यार्थियों की प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति में केंद्र सरकार के हिस्से से जुड़ा डेटा आगे नहीं बढ़ सका।
संस्थानों को कमियां दूर करने के निर्देश
उच्च शिक्षा निदेशालय ने शिक्षण संस्थानों को विद्यार्थियों के बैंक खातों की स्थिति की जांच करने और आधार सीडिंग से संबंधित कमियों को जल्द दूर करने को कहा है। आवश्यकता पड़ने पर विशेष शिविर लगाने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि लंबित मामलों का निपटारा किया जा सके।
विद्यार्थियों को भी करनी होगी जांच
छात्रवृत्ति का भुगतान समय पर पाने के लिए विद्यार्थियों को भी अपने बैंक से संपर्क करने की सलाह दी गई है। उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके बैंक खाते में आधार सीडिंग की प्रक्रिया पूरी है और एनपीसीआई मैपिंग की स्थिति सही है। इससे भुगतान में आ रही तकनीकी बाधाओं को दूर करने में मदद मिल सकती है।
अब संबंधित शिक्षण संस्थानों के सामने निर्धारित 15 दिनों के भीतर लंबित मामलों से जुड़ी कमियों को दूर कर रिपोर्ट सौंपने की चुनौती है। इस प्रक्रिया के पूरा होने से छात्रवृत्ति भुगतान में आ रही बाधाओं को दूर करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
