सोलन: कच्चे माल की महंगाई से गत्ता उद्योग पर संकट, 14 से 18 अक्टूबर तक बंद रहेंगी फैक्ट्रियां
क्राफ्ट पेपर के दाम 30 फीसदी तक बढ़ने से उद्योगपतियों की बढ़ी मुश्किलें, उत्पादन और सप्लाई पूरी तरह ठप रखने का ऐलान।
ग्राहक कंपनियों के पुराने रेट पर माल मांगने से बढ़ा टकराव, कीमतों में संशोधन नहीं हुआ तो बंदी बढ़ने के भी आसार।
बद्दी (सोलन)। हिमाचल प्रदेश में गत्ता उद्योग पर बढ़ती लागत का दबाव अब गहराने लगा है। कच्चे माल की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी और तैयार उत्पादों के पुराने दामों पर आपूर्ति के दबाव के बीच उद्योगपतियों ने बड़ा कदम उठाया है। हिमाचल प्रदेश कोरुगेटेड बॉक्स निर्माता संघ ने 14 से 18 अक्टूबर तक प्रदेशभर के गत्ता उद्योगों को पूरी तरह बंद रखने का निर्णय लिया है।
मंगलवार को बद्दी में आयोजित संघ की आपात बैठक में बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ औद्योगिक क्षेत्र सहित प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे उद्योगपतियों ने बढ़ती उत्पादन लागत पर चिंता जताई। उद्योगपतियों के अनुसार, जुलाई से अब तक क्राफ्ट पेपर की कीमतों में करीब 30 फीसदी तक वृद्धि हो चुकी है। इसके अलावा गोंद, सिलाई तार, रंग, माल ढुलाई, एलपीजी और मजदूरी की लागत भी बढ़ गई है।
उद्योगपतियों का कहना है कि उत्पादन लागत में भारी इजाफा होने के बावजूद ग्राहक कंपनियां पुराने रेट पर ही माल की आपूर्ति चाहती हैं। कीमतों में संशोधन नहीं होने से उद्योगों को लगातार नुकसान उठाना पड़ रहा है। ऐसे हालात में घाटे के बीच उत्पादन जारी रखना अब मुश्किल हो गया है।
कच्चे माल का स्टॉक खत्म, उत्पादन पर संकट
संघ के प्रतिनिधियों के मुताबिक, कई फैक्ट्रियों में क्राफ्ट पेपर का पुराना स्टॉक समाप्त हो चुका है। नई कीमतों पर कच्चा माल खरीदने से लागत और बढ़ने का खतरा है, जबकि पुराने दामों पर माल बेचने से नुकसान उठाना पड़ रहा है। कच्चे माल की कमी के कारण कई जगह मजदूरों को भी काम नहीं मिल पा रहा है।
उद्योगपतियों ने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित बंदी के दौरान न तो उत्पादन किया जाएगा और न ही किसी कंपनी या ग्राहक को माल की आपूर्ति होगी। इस अवधि में पेपर मिलों से बढ़ी हुई कीमतों पर क्राफ्ट पेपर की खरीद नहीं करने का भी निर्णय लिया गया है। संघ के अनुसार, यदि कीमतों में उचित संशोधन नहीं हुआ तो बंदी की अवधि आगे बढ़ाई जा सकती है।
उत्तर भारत के छह राज्यों में भी बढ़ी चिंता
गत्ता उद्योग में बढ़ती लागत का संकट केवल हिमाचल प्रदेश तक सीमित नहीं है। संघ के प्रतिनिधियों के अनुसार, हाल ही में हरियाणा के सोनीपत में उत्तर भारत के छह राज्यों के गत्ता उद्योगपतियों की बैठक हुई थी। इसमें हरियाणा, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान और उत्तराखंड के प्रतिनिधियों सहित करीब 250 गत्ता फैक्ट्रियों से जुड़े लोगों ने भाग लिया।
बैठक में कच्चे माल की बढ़ती कीमतों को लेकर चर्चा हुई और पेपर मिलों से छह दिन तक खरीद नहीं करने का निर्णय लिया गया। इसके साथ ही फैक्ट्रियों में उत्पादन सीमित करने पर भी सहमति बनी थी।
कीमतों में संशोधन नहीं हुआ तो बढ़ सकती है बंदी
गत्ता उद्योग संघ के प्रदेशाध्यक्ष हेमराज चौधरी ने कहा कि उद्योगों की मौजूदा स्थिति को देखते हुए कड़े निर्णय लेना जरूरी हो गया है। उन्होंने बताया कि 14 से 18 अक्टूबर तक प्रदेश के गत्ता उद्योग पूरी तरह बंद रखे जाएंगे। उद्योगों की मांग है कि कच्चे माल की बढ़ती लागत के अनुरूप तैयार उत्पादों की कीमतों में उचित संशोधन किया जाए।
उद्योगपतियों ने चेतावनी दी है कि यदि ग्राहक कंपनियां समय रहते कीमतों में बढ़ोतरी स्वीकार नहीं करती हैं तो उद्योगों का संकट और गंभीर हो सकता है। बैठक में संघ के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष सुरेंद्र जैन और उद्योगपति मुकेश जैन सहित अन्य प्रतिनिधि मौजूद रहे।
फिलहाल उद्योगों की नजर ग्राहक कंपनियों के रुख पर टिकी है। कीमतों को लेकर सहमति नहीं बनी तो बंदी लंबी खिंचने की आशंका है, जिसका असर गत्ता उत्पादन और माल की आपूर्ति पर पड़ सकता है।
