हिमाचल में पहली पोषण नीति की तैयारी, मिलावटखोरों पर कसेगा शिकंजा; दूध उत्पादकों को अब 6 रुपये प्रति लीटर प्रोत्साहन
शिमला। हिमाचल प्रदेश में खाद्य पदार्थों में मिलावट रोकने और लोगों को सुरक्षित भोजन उपलब्ध करवाने के लिए पहली बार पोषण नीति बनाई जाएगी। सरकार की नई पहल में मिलावट पर निगरानी बढ़ाने के साथ-साथ दूध उत्पादकों को मिलने वाली प्रोत्साहन राशि दोगुनी करने का भी फैसला लिया गया है।
हिमाचल प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक में प्रस्तावित पोषण नीति को लेकर विस्तृत प्रस्तुति दी गई। इसके आधार पर सरकार नीति का मसौदा तैयार करेगी, जिसे आगामी शीतकालीन सत्र में विधानसभा के समक्ष लाने की योजना है। विधानसभा से पारित होने के बाद इसे पूरे प्रदेश में लागू करने का लक्ष्य रखा गया है।
खाद्य पदार्थों में मिलावट रोकने पर रहेगा जोर
प्रस्तावित पोषण नीति का मुख्य उद्देश्य खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करना और मिलावट के मामलों पर अंकुश लगाना है। इसके तहत खाद्य पदार्थों की जांच करने वाली प्रयोगशालाओं को मजबूत करने और निगरानी व्यवस्था में सुधार पर ध्यान दिया जाएगा।
दूध, तेल, मसालों और मिठाइयों जैसे खाद्य पदार्थों में मिलावट रोकने के लिए जांच प्रक्रिया को प्रभावी बनाने की योजना है। घटिया, दूषित और सड़े-गले खाद्य पदार्थ बेचने वालों के खिलाफ जुर्माने और कानूनी कार्रवाई के मानक निर्धारित करने पर भी जोर रहेगा।
मिड-डे मील और आंगनबाड़ी के भोजन की भी होगी निगरानी
नीति के तहत सरकारी योजनाओं में वितरित होने वाले खाद्यान्नों की गुणवत्ता और पोषण स्तर पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। मिड-डे मील, आंगनबाड़ी केंद्रों और राशन डिपो के माध्यम से मिलने वाले खाद्य पदार्थों की निगरानी को मजबूत करने की योजना है।
इसके अलावा पैकेटबंद खाद्य पदार्थों में नमक, चीनी और ट्रांस फैट की निर्धारित सीमाओं का पालन सुनिश्चित करने पर भी जोर रहेगा। नीति का उद्देश्य दूषित भोजन से होने वाली बीमारियों के जोखिम को कम करने के साथ बच्चों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को बेहतर पोषण उपलब्ध करवाना है। कुपोषण और एनीमिया जैसी समस्याओं से निपटने को भी इसमें प्राथमिकता दी जाएगी।
दूध उत्पादकों को अब 6 रुपये प्रति लीटर प्रोत्साहन
मंत्रिमंडल ने दूध उत्पादकों को राहत देते हुए दूध प्रोत्साहन योजना के तहत मिलने वाली राशि तीन रुपये से बढ़ाकर छह रुपये प्रति लीटर करने को मंजूरी दी है। इससे प्रदेश के दूध उत्पादकों को आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद है।
इसके साथ ही सरकारी विभागों को अपनी जरूरत के लिए दूध और दुग्ध उत्पाद मिल्कफेड से खरीदने के निर्देश देने को भी मंजूरी दी गई है। इस कदम का उद्देश्य मिल्कफेड के माध्यम से दुग्ध उत्पादों की बिक्री को बढ़ावा देना और दूध उत्पादकों को बाजार उपलब्ध करवाने में मदद करना है।
