तारकोल की कमी ने रोकी सड़कों की रफ्तार, टारिंग सीजन में ठेकेदारों की बढ़ी परेशानी
मानसून के बाद सड़कों को दुरुस्त करने की तैयारी के बीच हिमाचल में तारकोल की अनियमित सप्लाई बड़ी बाधा बन गई है। कई इलाकों में ट्रक कई-कई दिन बाद पहुंचने से टारिंग का काम लगातार चलाना मुश्किल हो रहा है।
शिमला। मानसून की विदाई के बाद लोक निर्माण विभाग ने प्रदेशभर में सड़कों की मरम्मत और टारिंग का काम तेज करने की तैयारी की है, लेकिन तारकोल की पर्याप्त उपलब्धता नहीं होने से इस अभियान की रफ्तार प्रभावित हो रही है। ठेकेदारों का कहना है कि मांग के अनुरूप आपूर्ति नहीं मिलने के कारण कई जगह काम बीच में रोकना पड़ रहा है।
ठेकेदारों के मुताबिक कुछ क्षेत्रों में तारकोल का ट्रक तीन से चार दिन के अंतराल के बाद पहुंच रहा है। ऐसे में टारिंग के लिए तैनात मशीनरी और श्रमिकों को काम शुरू होने का इंतजार करना पड़ रहा है। इससे न केवल संसाधनों का उपयोग प्रभावित हो रहा है, बल्कि काम की समयसीमा भी बढ़ने की आशंका है।
लोक निर्माण विभाग ने मानसून के बाद करीब दो माह के भीतर लगभग 800 किलोमीटर सड़कों पर टारिंग और आवश्यक पैचवर्क पूरा करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए अधिकारियों और ठेकेदारों को काम में तेजी लाने के निर्देश भी दिए गए हैं। हालांकि, तारकोल की आपूर्ति सुचारु नहीं होने से जमीनी स्तर पर लक्ष्य हासिल करना चुनौती बनता दिखाई दे रहा है।
ठेकेदार यूनियन के अध्यक्ष सतीश बिज ने कहा कि कई स्थानों पर चौथे दिन तारकोल का ट्रक उपलब्ध हो रहा है। ऐसे में लगातार टारिंग करना संभव नहीं है। उन्होंने सरकार से मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर तारकोल की उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग की है।
यूनियन का कहना है कि सड़कों की टारिंग के लिए मौसम अनुकूल रहने की अवधि सीमित होती है। यदि इस दौरान सामग्री की आपूर्ति बाधित रही तो निर्धारित समय में सड़क कार्य पूरा करना मुश्किल हो सकता है। ठेकेदारों ने सरकार से तारकोल की सप्लाई के लिए स्पष्ट शेड्यूल तय करने और नियमित उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग उठाई है।
