शाहपुर की सियासत में लंबे समय तक प्रभावी रहे मनकोटिया, सरवीण चौधरी से चुनावी मुकाबलों ने बनाई अलग पहचान; बेबाक अंदाज के लिए भी रहे चर्चित
कांगड़ा। शाहपुर की सियासत के उस दौर का अंत हो गया, जिसमें बेबाक तेवर और चुनावी टकराव ने हिमाचल की राजनीति में अलग पहचान बनाई थी। मेजर विजय सिंह मनकोटिया के निधन के साथ प्रदेश की राजनीति ने अपना एक चर्चित और प्रभावशाली चेहरा खो दिया।
मेजर विजय सिंह मनकोटिया का राजनीतिक सफर केवल चुनावी जीत-हार तक सीमित नहीं रहा। शाहपुर विधानसभा क्षेत्र से शुरू हुई उनकी राजनीति ने उन्हें प्रदेश सरकार में मंत्री की जिम्मेदारी तक पहुंचाया। सेना में सेवा देने के बाद राजनीति में कदम रखने वाले मनकोटिया ने अपने स्पष्ट वक्तव्य और बेबाक राजनीतिक शैली से प्रदेश की सियासत में अलग पहचान बनाई।
शाहपुर में मनकोटिया बनाम सरवीण चौधरी की टक्कर रही चर्चा में
शाहपुर की राजनीति में मेजर मनकोटिया और पूर्व मंत्री सरवीण चौधरी का चुनावी मुकाबला लंबे समय तक चर्चा का विषय रहा। दोनों नेता एक दौर में क्षेत्र की राजनीति के प्रमुख प्रतिद्वंद्वी माने जाते थे और विधानसभा चुनावों में आमने-सामने आने पर पूरे क्षेत्र की निगाहें इस मुकाबले पर रहती थीं।
2012 और 2017 के विधानसभा चुनावों में दोनों नेताओं के बीच सीधा मुकाबला हुआ। दोनों चुनावों में सरवीण चौधरी ने जीत हासिल की, जबकि मेजर मनकोटिया को पराजय का सामना करना पड़ा। वर्ष 2017 में मनकोटिया दूसरे स्थान पर रहे।
हालांकि राजनीति में परिस्थितियां हमेशा एक जैसी नहीं रहतीं। समय के साथ दोनों नेताओं के राजनीतिक रास्तों में बदलाव आया और एक ऐसा दौर भी आया, जब कभी चुनावी मैदान में आमने-सामने रहने वाले नेता एक ही राजनीतिक मंच पर नजर आए।
कई दौर और राजनीतिक मंचों से गुजरा सफर
मेजर विजय सिंह मनकोटिया का राजनीतिक जीवन कई उतार-चढ़ावों से भरा रहा। उन्होंने अलग-अलग राजनीतिक दौर में विभिन्न मंचों पर अपनी सक्रियता दर्ज कराई। बाद के समय में उनका जुड़ाव भाजपा से हुआ।
उनकी राजनीति की खास बात यह रही कि परिस्थितियां बदलने के बावजूद उनका सार्वजनिक जीवन लगातार चर्चा में बना रहा। शाहपुर में उनकी राजनीतिक मौजूदगी और क्षेत्र के लोगों के साथ उनका जुड़ाव लंबे समय तक उनकी पहचान का हिस्सा रहा।
बेबाक बयानों के लिए भी रहे चर्चित
मेजर मनकोटिया का नाम हिमाचल की राजनीति में उनके स्पष्ट और बेबाक अंदाज के लिए भी जाना जाता रहा। वह कई राजनीतिक और सार्वजनिक मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखते थे। उनके बयानों और राजनीतिक रुख को लेकर समय-समय पर प्रदेश की सियासत में चर्चाएं भी होती रहीं।
पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के साथ उनके राजनीतिक मतभेद भी हिमाचल के राजनीतिक इतिहास के चर्चित प्रसंगों में शामिल रहे। इसके बावजूद मनकोटिया ने लंबे समय तक सक्रिय सार्वजनिक जीवन जारी रखा।
निधन से शाहपुर-कांगड़ा में शोक
मेजर विजय सिंह मनकोटिया के निधन की खबर सामने आने के बाद शाहपुर और कांगड़ा क्षेत्र में शोक की लहर है। राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोग उनके लंबे सार्वजनिक जीवन और शाहपुर के साथ उनके जुड़ाव को याद कर रहे हैं।
उनके निधन के साथ हिमाचल की राजनीति का एक ऐसा अध्याय समाप्त हो गया, जिसमें चुनावी प्रतिद्वंद्विता, बेबाक बयानबाजी और बदलते राजनीतिक रिश्तों की कई कहानियां दर्ज हैं। शाहपुर की सियासत में मेजर मनकोटिया की भूमिका और उनके दौर की राजनीतिक हलचल लंबे समय तक याद की जाती रहेगी।
