गेहूं की बिजाई से पहले ही हिमाचल के किसानों को बड़ा झटका।
इस बार 12:32:16 खाद नहीं मिलेगी, अब डीएपी और 16:16 खाद के सहारे गेहूं की बिजाई करनी होगी
कांगड़ा। केंद्र से 12:32:16 की सप्लाई रुकने के बाद किसानों की चिंता बढ़ गई है। खाद की उपलब्धता को लेकर किसान सोसायटियों और बिक्री केंद्रों के चक्कर काट रहे हैं, जबकि धान की कटाई के बाद अब गेहूं की बिजाई का समय नजदीक है।
बताया जा रहा है कि विदेशों से खाद तैयार करने के लिए जरूरी कच्चा माल उपलब्ध नहीं होने के कारण 12:32:16 की आपूर्ति प्रभावित हुई है। विदेशों में चल रहे युद्ध को भी इसकी सप्लाई प्रभावित होने की वजह माना जा रहा है। ऐसे में हिमाचल में किसानों को अब विकल्प के तौर पर डीएपी और 16:16 खाद उपलब्ध करवाने की व्यवस्था की जा रही है।
समय पर खाद नहीं मिली तो बढ़ सकती है परेशानी
धान की कटाई के बाद किसान गेहूं की बिजाई की तैयारियों में जुटने वाले हैं। ऐसे समय में खाद की किस्म में बदलाव ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। किसानों को आशंका है कि यदि वैकल्पिक खाद भी मांग के मुताबिक उपलब्ध नहीं हुई तो उन्हें बिजाई के समय सोसायटियों और बिक्री केंद्रों के चक्कर लगाने पड़ सकते हैं।
प्रदेश में किसानों को खाद हिमफेड के माध्यम से उपलब्ध करवाई जाती है। 12:32:16 की सप्लाई नहीं होने के कारण अब डीएपी और 16:16 खाद पर निर्भरता बढ़ेगी।
कांगड़ा में करीब 2 हजार मीट्रिक टन खाद की मांग
कृषि विभाग के अनुसार हिमाचल प्रदेश में करीब 3.24 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गेहूं की खेती होती है। इनमें जिला कांगड़ा में करीब 90 हजार हेक्टेयर भूमि पर गेहूं की पैदावार की जाती है। कांगड़ा जिले में हर साल गेहूं की बिजाई के लिए करीब 2,000 मीट्रिक टन खाद की मांग रहती है।
12:32:16 खाद की उपलब्धता नहीं होने के कारण अब किसानों को सोसायटियों और अन्य बिक्री केंद्रों पर डीएपी और 16:16 खाद ही उपलब्ध होगी। किसानों के बीच यह सवाल भी बना हुआ है कि वैकल्पिक खाद का इस्तेमाल करने से फसल पर क्या असर पड़ेगा।
डीएपी और 16:16 की सप्लाई जारी
हिमफेड कांगड़ा के प्रबंधक प्रदीप शर्मा ने बताया कि केंद्र की ओर से 12:32:16 खाद की आपूर्ति रोक दी गई है। इसके विकल्प के तौर पर डीएपी और 16:16 खाद उपलब्ध करवाई जा रही है। उन्होंने बताया कि डीएपी की कीमत 1,350 रुपये प्रति बोरी, जबकि 16:16 खाद की कीमत 2,250 रुपये प्रति बोरी है।
उनके अनुसार दोनों खादों की सप्लाई जारी है और मांग के अनुसार इन्हें सोसायटियों तक पहुंचाया जा रहा है।
