एक बार फिर हिमाचल की बेटियों ने कबड्डी के मैदान में देश का तिरंगा सबसे ऊपर लहरा दिया।
पुष्पा राणा की कप्तानी में भारत ने ईरान को 37-34 से हराकर लगातार दूसरी बार महिला कबड्डी का स्वर्ण पदक अपने नाम किया, जिसमें हिमाचल की चार खिलाड़ियों की अहम भूमिका रही।
खेल डेस्क-दैनिक जनवार्ता
नई दिल्ली/शिमला। एशियन गेम्स 2026 में भारतीय महिला कबड्डी टीम की स्वर्णिम जीत ने हिमाचल प्रदेश को भी गौरवान्वित किया है। टीम में हिमाचल की चार खिलाड़ी—कप्तान पुष्पा राणा, ज्योति ठाकुर, रितु नेगी और भावना ठाकुर—शामिल रहीं। इन चारों ने अलग-अलग भूमिकाओं में भारतीय टीम के अभियान को मजबूती दी।
हिमाचल की इन बेटियों के लिए यह जीत इसलिए भी खास रही, क्योंकि पिछली बार भी प्रदेश की खिलाड़ी भारतीय टीम के स्वर्ण अभियान का हिस्सा थीं। हांगझोउ एशियन गेम्स में रितु नेगी की कप्तानी में भारत ने स्वर्ण जीता था। इस बार कप्तानी की जिम्मेदारी पुष्पा राणा के हाथों में रही और टीम ने फिर स्वर्ण पदक जीतकर पिछली सफलता को दोहरा दिया।
कप्तान पुष्पा राणा ने संभाली कमान
सिरमौर के शिलाई क्षेत्र के मिल्लाह गांव की रहने वाली पुष्पा राणा भारतीय टीम में राइट रेडर की भूमिका निभाती हैं। 11 जनवरी 1998 को जन्मीं पुष्पा को कबड्डी का शुरुआती प्रशिक्षण अपने पिता जयपाल से मिला, जो खुद भी कबड्डी खिलाड़ी रहे हैं।
पुष्पा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई पदक जीत चुकी हैं। हांगझोउ एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने वाली टीम का हिस्सा बनने के बाद 2026 में उन्हें भारतीय महिला कबड्डी टीम की कप्तानी सौंपी गई। बोनस अंक और हैंडटच के लिए पहचानी जाने वाली पुष्पा ने कप्तान के तौर पर भी टीम को स्वर्ण पदक तक पहुंचाया।
ज्योति ठाकुर बनीं डिफेंस की मजबूत कड़ी
सोलन की ज्योति ठाकुर भारतीय महिला कबड्डी टीम की अहम डिफेंडर हैं। उन्होंने धर्मशाला स्थित साई राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र में प्रशिक्षण हासिल किया है।
ज्योति 2023 के एशियन गेम्स में भी स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय महिला कबड्डी टीम का हिस्सा थीं। उस फाइनल में भारत ने चीनी ताइपे को 26-25 से हराया था। 2026 में भी टीम में जगह बनाकर ज्योति ने लगातार दूसरी बार एशियन गेम्स का स्वर्ण पदक अपने नाम किया।
रितु नेगी का अनुभव आया काम
सिरमौर के शिलाई क्षेत्र के शरोग गांव की रितु नेगी भारतीय महिला कबड्डी की अनुभवी खिलाड़ियों में शामिल हैं। उन्होंने आठवीं कक्षा से कबड्डी खेलना शुरू किया और वर्ष 2006 में खेल छात्रावास बिलासपुर के लिए चुनी गईं।
करीब आठ साल तक प्रशिक्षण लेने के बाद रितु ने राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई। हांगझोउ एशियन गेम्स में उन्होंने भारतीय टीम की कप्तानी करते हुए स्वर्ण पदक जीता था। इससे पहले 2018 एशियन गेम्स में उन्होंने रजत और 2019 दक्षिण एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक हासिल किया था।
2025 महिला कबड्डी विश्व कप में भी रितु ने भारतीय टीम की कप्तानी की। 2026 में उन्होंने कप्तानी की जिम्मेदारी पुष्पा राणा को सौंपते हुए अपने अनुभव से टीम को मजबूती दी और एक बार फिर एशियन गेम्स का स्वर्ण पदक हासिल किया।
भावना ठाकुर का एशियन गेम्स डेब्यू स्वर्णिम रहा
मंडी की भावना ठाकुर हिमाचल से भारतीय महिला कबड्डी टीम में शामिल चौथी खिलाड़ी रहीं। 2023 एशियन गेम्स की स्वर्ण पदक विजेता टीम में भावना शामिल नहीं थीं, लेकिन 2026 में उन्हें पहली बार एशियन गेम्स में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला।
भावना के लिए यह डेब्यू यादगार बन गया। अपने पहले ही एशियन गेम्स में उन्होंने भारतीय टीम के साथ फाइनल में ईरान को हराकर स्वर्ण पदक हासिल किया।
हिमाचल की चार बेटियों का स्वर्णिम योगदान
पुष्पा राणा की कप्तानी, ज्योति ठाकुर का डिफेंस, रितु नेगी का अनुभव और भावना ठाकुर का एशियन गेम्स डेब्यू—इन चारों ने 2026 के भारतीय महिला कबड्डी अभियान में हिमाचल की मौजूदगी को खास बना दिया। भारत की 37-34 की जीत के साथ हिमाचल की इन चार बेटियों ने भी प्रदेश के खेल इतिहास में एक और स्वर्णिम अध्याय जोड़ दिया।
