सराहां में आज से आस्था, संस्कृति और खेलों का संगम
तीन दिन तक चलने वाले राज्यस्तरीय वामन द्वादशी मेले में शोभायात्रा, नौका विहार, दंगल और सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे मुख्य आकर्षण
सराहाँ (सिरमौर)। सराहां में 23 से 25 सितंबर तक वामन द्वादशी मेला धूमधाम से आयोजित किया जाएगा। मेले का शुभारंभ 23 सितंबर को वामन भगवान की पूजा-अर्चना और भव्य शोभायात्रा के साथ होगा। इसके बाद ऐतिहासिक शिरगुल तालाब में भगवान वामन की पालकी का नौका विहार कराया जाएगा।
मेले के पहले दिन उपायुक्त सिरमौर वामन भगवान के मंदिर में पूजा-अर्चना करेंगे। इसके बाद पालकी को कंधा देकर शोभायात्रा का शुभारंभ किया जाएगा। इस दौरान विभिन्न विभागों की ओर से लगाई गई विकासात्मक प्रदर्शनी का भी उद्घाटन होगा।
शोभायात्रा में दूलांजी की झांकियां, बोडू साहिब की गतका पार्टी, होमगार्ड बैंड, एनसीसी और स्काउट एंड गाइड के विद्यार्थी हिस्सा लेंगे। धार्मिक आयोजन के साथ मेले में स्थानीय संस्कृति और पारंपरिक गतिविधियों की भी झलक देखने को मिलेगी।
24 सितंबर को दंगल और सांस्कृतिक कार्यक्रम रहेंगे आकर्षण का केंद्र
मेले के दूसरे दिन विशाल दंगल का आयोजन किया जाएगा। इसके अलावा कबड्डी और बोली बोल प्रतियोगिता भी होगी। शाम छह बजे से रात 12 बजे तक सांस्कृतिक संध्या आयोजित की जाएगी, जिसमें जिला और प्रदेश के कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देंगे।
25 सितंबर को होंगे कुश्ती के फाइनल मुकाबले
मेले के अंतिम दिन पुरुष कुश्ती प्रतियोगिता के सेमीफाइनल और फाइनल मुकाबले होंगे। महिला कुश्ती भी दर्शकों के लिए खास आकर्षण रहेगी। मेले की तीनों सांस्कृतिक संध्याओं में हिमाचल के नामी कलाकार प्रस्तुतियां देंगे।
पहले ब्लॉक और बाद में जिला स्तर पर आयोजित होने वाला यह आयोजन अब राज्यस्तरीय मेले का रूप ले चुका है। मेले की बढ़ती लोकप्रियता और श्रद्धालुओं की लगातार बढ़ रही संख्या को देखते हुए इसकी अवधि दो से बढ़ाकर तीन दिन कर दी गई है। तीनों दिन दिन के समय विभिन्न गतिविधियां और रात में सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
एसडीएम पच्छाद प्रियंका चंद्र के अनुसार, मेले के दूसरे और तीसरे दिन मुख्य अतिथि कार्यक्रम में शामिल होंगे। प्रशासन की ओर से मेले को आकर्षक और व्यवस्थित बनाने के लिए तैयारियां पूरी की जा रही हैं।
प्राचीन समय से आयोजित हो रहा वामन द्वादशी मेला धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक और सांस्कृतिक मेलजोल का भी प्रमुख केंद्र है। हिमाचल प्रदेश के विभिन्न हिस्सों के अलावा दूसरे राज्यों से भी श्रद्धालु और लोग इस मेले में पहुंचते हैं।
