ज्वालामुखी मंदिर में आत्मदाह के प्रयास के बाद राजस्थान के श्रद्धालु की इलाज के दौरान मौत
—जानिए इस खौफनाक कदम के पीछे की पूरी कहानी। शक्तिपीठ के गर्भगृह के बाहर अचानक उठीं आग की लपटों ने हर किसी को दहला दिया, जिसके बाद पुलिस अब इस दर्दनाक कदम की वजह तलाश रही है।
ज्वालामुखी (कांगड़ा)। हिमाचल प्रदेश के विश्वविख्यात शक्तिपीठ ज्वालामुखी मंदिर परिसर में वीरवार शाम हुई एक दर्दनाक घटना में गंभीर रूप से झुलसे राजस्थान के श्रद्धालु की शुक्रवार को मौत हो गई। श्रद्धालु ने मंदिर के गर्भगृह के बाहर खुद पर पेट्रोल छिड़ककर आग लगा ली थी, जिससे वह करीब 60 फीसदी तक झुलस गया था। उसे गंभीर हालत में टांडा मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया।
गर्भगृह के बाहर मचा हड़कंप
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, घटना वीरवार शाम करीब 7:30 बजे ज्वालामुखी मंदिर के गर्भगृह के समीप पीपल के पेड़ के पास हुई। श्रद्धालु ने अचानक अपने ऊपर पेट्रोल उड़ेलकर आग लगा ली। देखते ही देखते आग की लपटें उठने लगीं, जिससे श्रद्धालुओं और मंदिर परिसर में अफरातफरी मच गई।
एंबुलेंस से पहुंचाया गया अस्पताल
घटना होते ही मंदिर प्रशासन और सुरक्षा कर्मियों ने मुस्तैदी दिखाते हुए आग बुझाई और झुलसे श्रद्धालु को तुरंत एंबुलेंस के जरिए ज्वालामुखी अस्पताल पहुंचाया। प्राथमिक उपचार के बाद, डॉक्टरों ने उसकी 60 फीसदी झुलसी हालत को अति संवेदनशील मानते हुए उसे बेहतर इलाज के लिए डॉ. राजेंद्र प्रसाद राजकीय मेडिकल कॉलेज (टांडा) रेफर कर दिया। हालांकि, चिकित्सकों के अथक प्रयासों के बावजूद शुक्रवार को उसने दम तोड़ दिया।
कारणों की जांच में जुटी पुलिस
डीएसपी ज्वालामुखी संजय शर्मा ने श्रद्धालु की मौत की पुष्टि करते हुए बताया कि पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस इस बात का पता लगाने की कोशिश कर रही है कि श्रद्धालु ने इतना आत्मघाती कदम क्यों उठाया। फिलहाल घटना के कारणों का खुलासा नहीं हो सका है और पुलिस मृतक की पृष्ठभूमि खंगालने में जुटी है।
