चंबा की सेईकोठी पंचायत का मामला, जांच में अनियमितताएं उजागर; पंचायत सचिव निलंबित, ग्राम रोजगार सेवक को नोटिस और तबादले के निर्देश
हिमाचल में पीएम आवास योजना में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। मृत व्यक्ति के नाम आवास मंजूर कर 65 हजार रुपये की पहली किस्त भी जारी कर दी गई।
चंबा। प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) में नियमों की अनदेखी का मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने कार्रवाई की है। चंबा जिले की ग्राम पंचायत सेईकोठी में एक मृत व्यक्ति के नाम पर आवास स्वीकृत करने और पहली किस्त जारी करने के मामले में तत्कालीन पंचायत सचिव प्रताप सिंह को निलंबित कर दिया गया है।
मामला सेईकोठी पंचायत के ओहला गांव का है। शिकायत के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 की लाभार्थी सूची में नरवाड़ निवासी भागी पुत्र दसरावन का नाम पीएमएवाई-जी के तहत दर्ज किया गया था। शिकायतकर्ता मान सिंह ने दावा किया कि भागी की मृत्यु 12 मार्च 2024 को ही हो चुकी थी। इसके बावजूद उसके नाम पर आवास के लिए 1.30 लाख रुपये की सहायता स्वीकृत कर दी गई और 65 हजार रुपये की पहली किस्त भी जारी हो गई।
जांच में सामने आईं गंभीर अनियमितताएं
मामले की शिकायत ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग के निदेशक से की गई थी। शिकायत में पूरे प्रकरण की विभागीय जांच कराने के साथ सरकारी धन की वसूली और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई थी।
इसके बाद बीडीओ तीसा की ओर से मामले की जांच की गई। 11 सितंबर को भेजी गई जांच रिपोर्ट में लाभार्थियों के सत्यापन, रिकॉर्ड की जांच और योजना के तहत निर्धारित प्रक्रिया के पालन में गंभीर खामियां सामने आने की बात कही गई।
जांच में शिकायत के आरोप सही पाए जाने के बाद प्रशासन ने तत्कालीन पंचायत सचिव के खिलाफ विभागीय कार्रवाई का फैसला लिया।
पंचायत सचिव निलंबित, रोजगार सेवक को नोटिस
जिला परिषद चंबा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं एडीसी अमित मेहरा ने मंगलवार को तत्कालीन पंचायत सचिव प्रताप सिंह के निलंबन के आदेश जारी किए। वहीं, संबंधित ग्राम रोजगार सेवक से भी जवाब मांगा गया है।
ग्राम रोजगार सेवक को एक माह का नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा बीडीओ तीसा को ग्राम रोजगार सेवक का मौजूदा पंचायत से तत्काल तबादला करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
अब सरकारी राशि की वसूली पर नजर
प्रशासनिक कार्रवाई के बाद अब मामले में विभागीय जवाब और सरकारी सहायता की वसूली से जुड़ी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। जांच में सामने आई अनियमितताओं के आधार पर जिम्मेदारी तय करने की कार्रवाई भी की जा रही है।
यह मामला पीएमएवाई-जी जैसी सरकारी आवास योजना में लाभार्थियों के सत्यापन और दस्तावेजों की जांच की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े करता है। अब विभागीय कार्रवाई के अगले चरण में यह स्पष्ट होगा कि जारी की गई 65 हजार रुपये की राशि की वसूली किस तरह की जाती है और मामले में अन्य स्तर पर किसी की जिम्मेदारी तय होती है या नहीं।
