किशाऊ बांध पर हिमाचल की बड़ी जीत—सरकार ने 2,000 करोड़ रुपये के संभावित वित्तीय बोझ से प्रदेश को बाहर रखने में सफलता हासिल की।
सीएम सुक्खू बोले- विस्थापन और पर्यावरणीय प्रभाव हिमाचल को झेलना होगा, इसलिए बिजली घटक की लागत भी लाभ पाने वाले राज्यों को उठानी चाहिए।
422 मेगावाट की किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना के लिए छह राज्यों ने किया एमओयू, हिमाचल को हर साल 1,000 मिलियन यूनिट बिजली और 1,000 करोड़ से अधिक आय की उम्मीद
नई दिल्ली/शिमला: उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा पर टोंस नदी पर प्रस्तावित किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना के निर्माण का रास्ता अब और साफ हो गया है। 422 मेगावाट क्षमता वाली इस परियोजना के लिए मंगलवार को नई दिल्ली में हिमाचल प्रदेश समेत हरियाणा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और राजस्थान ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। करीब 15,624 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली इस परियोजना को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में एमओयू की प्रक्रिया पूरी हुई।
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि हिमाचल प्रदेश सरकार ने परियोजना में राज्य के वित्तीय हितों को प्राथमिकता देते हुए करीब 2,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त देनदारी से प्रदेश को बचाया है। उनके मुताबिक, बिजली घटक पर हिमाचल की ओर से आने वाली अनुमानित लागत को जल घटक से लाभ पाने वाले दिल्ली, राजस्थान और हरियाणा वहन करेंगे।
16 जून की बैठक में बनी थी सहमति
सीएम सुक्खू ने बताया कि 16 जून 2026 को केंद्रीय गृह मंत्री की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा हुई थी। बैठक में केंद्र सरकार ने सैद्धांतिक तौर पर इस बात पर सहमति जताई थी कि बिजली घटक की करीब 2,000 करोड़ रुपये की लागत का भार जल घटक से लाभान्वित होने वाले राज्यों पर डाला जाए।
सुक्खू के अनुसार, प्रदेश सरकार ने लगातार यह मामला केंद्र के सामने उठाया, ताकि हिमाचल के सीमित वित्तीय संसाधनों पर अतिरिक्त बोझ न पड़े।
800 करोड़ की हिस्सेदारी वाले पुराने प्रस्ताव को ठुकराया
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकार ने परियोजना में हिमाचल की ओर से करीब 800 करोड़ रुपये की वित्तीय हिस्सेदारी पर सहमति जताई थी। मौजूदा सरकार ने प्रदेश की आर्थिक स्थिति को देखते हुए इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया।
उन्होंने तर्क दिया कि किशाऊ परियोजना के जल घटक के लिए केंद्र सरकार 90 प्रतिशत अनुदान दे रही है। ऐसे में बिजली घटक के लिए हिमाचल को अतिरिक्त वित्तीय बोझ उठाने के लिए कहना उचित नहीं होगा।
विस्थापन का सबसे बड़ा असर हिमाचल पर
सुक्खू ने कहा कि परियोजना के निर्माण से हिमाचल के संबंधित क्षेत्रों की आबादी को विस्थापन जैसी चुनौती का सामना करना पड़ेगा। परियोजना के सामाजिक और अन्य प्रभावों का सबसे अधिक असर हिमाचल पर पड़ने की बात कहते हुए उन्होंने कहा कि राज्य पर अतिरिक्त आर्थिक भार डालना न्यायसंगत नहीं है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्र की प्रगति में हिमाचल के योगदान की उचित भरपाई होनी चाहिए और प्रदेश के वैध अधिकारों की रक्षा करना सरकार की प्राथमिकता है।
हर साल मिलेगी 1,000 मिलियन यूनिट बिजली
मुख्यमंत्री के मुताबिक, किशाऊ परियोजना के बिजली घटक में हिमाचल प्रदेश को हर साल करीब 1,000 मिलियन यूनिट बिजली की हिस्सेदारी मिलेगी। परियोजना के निर्माण के बाद राज्य को इससे सालाना 1,000 करोड़ रुपये से अधिक की आय होने की संभावना है।
उन्होंने इसे प्रदेश के सीमित वित्तीय संसाधनों को मजबूत करने की दिशा में अहम उपलब्धि बताया। सीएम ने कहा कि किशाऊ परियोजना में हिमाचल की उचित हिस्सेदारी और अधिकार सुरक्षित करना प्रदेश के हितों की रक्षा की दिशा में बड़ी सफलता है।
एमओयू हस्ताक्षर कार्यक्रम में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल के अलावा हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा मौजूद रहे। इस दौरान हिमाचल के मुख्य सचिव केके पंत और अतिरिक्त मुख्य सचिव आरडी नजीम भी उपस्थित थे।
