हिंदी के प्रति सम्मान और रचनात्मकता का दिखा संगम, कालाअंब में विद्यार्थियों ने प्रतियोगिताओं में लिया उत्साह से हिस्सा।
नारा लेखन और भाषण के जरिए छात्रों ने हिंदी की महत्ता, संस्कृति और राष्ट्र निर्माण में इसकी भूमिका को प्रभावी ढंग से किया प्रस्तुत।
हिंदी दिवस पर हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी में विविध कार्यक्रम
कालाअंब (सिरमौर)। हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी, कालाअंब में हिंदी दिवस के अवसर पर विद्यार्थियों के लिए विभिन्न कार्यक्रम एवं प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। समारोह का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में हिंदी भाषा के प्रति सम्मान, गौरव और जागरूकता बढ़ाने के साथ उनकी रचनात्मकता एवं अभिव्यक्ति क्षमता को प्रोत्साहित करना रहा।
कार्यक्रम के दौरान नारा लेखन और भाषण प्रतियोगिता समेत विभिन्न गतिविधियां करवाई गईं। विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हुए हिंदी भाषा के महत्व, राष्ट्र निर्माण में इसके योगदान तथा भारतीय संस्कृति में इसकी भूमिका पर अपने विचार प्रस्तुत किए।
नारा लेखन और भाषण प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने अपनी कल्पनाशीलता और वक्तृत्व कौशल का प्रभावी प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता में बी.फार्मा तृतीय वर्ष की छात्रा मुस्कान सैयद ने प्रथम स्थान हासिल किया। उनके प्रभावशाली प्रदर्शन और प्रस्तुति की उपस्थित लोगों ने सराहना की।
इस अवसर पर हिमालयन ग्रुप ऑफ प्रोफेशनल इंस्टीट्यूशंस के उपाध्यक्ष विकास बंसल ने विद्यार्थियों को हिंदी दिवस की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि हिंदी हमारी संस्कृति, परंपरा और भावनाओं को व्यक्त करने वाली सशक्त भाषा है। उन्होंने विद्यार्थियों से हिंदी के सम्मान और संवर्धन के लिए निरंतर प्रयास करने का आह्वान किया।
संस्थान के प्राचार्य डॉ. राम बाबू शर्मा ने कहा कि हिंदी महज संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक पहचान और राष्ट्रीय एकता का महत्वपूर्ण आधार है। उन्होंने विद्यार्थियों से अन्य भाषाओं का ज्ञान हासिल करने के साथ हिंदी के प्रति भी सम्मान और गौरव की भावना बनाए रखने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि इस तरह की गतिविधियां विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास के साथ उनकी रचनात्मकता, आत्मविश्वास और अभिव्यक्ति क्षमता को निखारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
कार्यक्रम के समापन पर विजेता छात्रा को बधाई दी गई और सभी प्रतिभागियों की सक्रिय भागीदारी की सराहना की गई। हिंदी दिवस समारोह ने विद्यार्थियों में हिंदी भाषा के प्रति उत्साह, गौरव और सम्मान की भावना को और मजबूत किया।
