दो दिन तक घर में कैद रहे बुजुर्ग दंपती, फोन पर खुद को NIA अधिकारी बताने वाले ठगों ने ऐसा डराया कि जिंदगीभर की जमा-पूंजी गंवा बैठे।
नालागढ़ में ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर हुई इस ठगी में दंपती ने अपनी सभी एफडी तुड़वाकर 72.10 लाख रुपये साइबर ठगों के बताए खाते में जमा कर दिए।
नालागढ़ में डिजिटल अरेस्ट कर 72.10 लाख की ठगी
नालागढ़ (सोलन)। सोलन जिले के नालागढ़ में साइबर ठगी का हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां शातिरों ने एक बुजुर्ग दंपती को डिजिटल अरेस्ट कर करीब 72.10 लाख रुपये ठग लिए। दंपती से दो दिन तक फोन के जरिए संपर्क में रहने और किसी से घटना साझा न करने का दबाव बनाया गया।
जानकारी के मुताबिक, 5 सितंबर को दंपती के पास एक फोन आया। कॉल करने वाले ने खुद को एनआईए का चीफ प्रकाश अग्रवाल बताया। उसने दंपती से कहा कि वे एटीएस की निगरानी में हैं और उनके आधार कार्ड का इस्तेमाल केनरा बैंक से जुड़ी आतंकी गतिविधियों में किया गया है।
ठगों ने दंपती को कथित मामले से बाहर निकालने का झांसा दिया और कहा कि इसके लिए उनकी बताई प्रक्रिया का पालन करना होगा। साथ ही धमकी दी गई कि अगर उन्होंने किसी रिश्तेदार, परिचित या अन्य व्यक्ति को इस बारे में बताया तो उनके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।
दस्तावेज लेने के बाद मांगी ‘सुरक्षा राशि’
साइबर ठगों ने दंपती से बैंक खाते की जानकारी के साथ आधार कार्ड और पैन कार्ड समेत कई दस्तावेज हासिल कर लिए। इसके बाद 72.10 लाख रुपये को कथित ‘सुरक्षा राशि’ के तौर पर जमा करने के लिए कहा गया।
ठगों ने दंपती से एक आवेदन भी लिखवाया, जिसमें उन्हें वरिष्ठ नागरिक और बीमार होने का उल्लेख करने को कहा गया। लगातार डर और दबाव के बीच दंपती ठगों के निर्देशों का पालन करते रहे।
एफडी तुड़वाकर बैंक पहुंचे दंपती
ठगों के कहने पर बुजुर्ग दंपती नालागढ़ स्थित पंजाब नेशनल बैंक पहुंचे। उन्होंने अपनी एफडी तुड़वाने की प्रक्रिया शुरू की। बैंक प्रबंधक सौरभ मोक्टा को मामला संदिग्ध लगा। उन्होंने करीब आधे घंटे तक दंपती को समझाया और साइबर ठगी की आशंका जताते हुए पैसे ट्रांसफर न करने की सलाह दी।
हालांकि, दंपती इतने डरे हुए थे कि उन्होंने बैंक प्रबंधक को बताया कि उन्हें संपत्ति खरीदनी है। समझाने के बावजूद उन्होंने एफडी तुड़वा दीं और कुल 72.10 लाख रुपये ठगों के बताए खाते में जमा कर दिए।
पेंशनर समूह में दस्तावेज पहुंचने से खुला राज
दंपती ने घटना को काफी समय तक गुप्त रखा। मामला तब सामने आया, जब ठगों को भेजे जाने वाले दस्तावेज गलती से नालागढ़ के पेंशनर समूह में पहुंच गए। पत्र में दंपती ने खुद को हृदय रोगी बताते हुए मदद की अपील की थी।
इसके बाद पंजाब नेशनल बैंक नालागढ़ के सेवानिवृत्त प्रबंधक अश्वनी घई दंपती के घर पहुंचे। उन्होंने काफी समझाने के बाद पूरी घटना की जानकारी हासिल की और बैंक को सूचित किया। हालांकि, तब तक साइबर ठग रकम को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर चुके थे।
दंपती ने अब साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और ठगी की रकम को ट्रेस करने का प्रयास किया जा रहा है।
