सांप के डसने पर अब इलाज के लिए अस्पताल पहुंचने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। हिमाचल में 108 एंबुलेंस के जरिए मरीज को अस्पताल पहुंचने से पहले ही एंटी स्नेक वेनम देने की तैयारी शुरू हो गई है।
शिमला। हिमाचल प्रदेश में सर्पदंश के मामलों में समय पर उपचार उपलब्ध करवाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने अहम पहल शुरू की है। प्रदेश में संचालित करीब 250 एंबुलेंस में एंटी स्नेक वेनम उपलब्ध करवाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों के मरीजों को मिलने की उम्मीद है, जहां अस्पताल तक पहुंचने में काफी समय लग जाता है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, 108 एंबुलेंस को कॉल करते समय अगर मरीज को सांप ने डसा है तो इसकी जानकारी कॉल सेंटर को देना जरूरी होगा। सूचना मिलते ही संबंधित क्षेत्र की एंबुलेंस को मौके पर भेजा जाएगा।
हालांकि, एंबुलेंस में तैनात स्वास्थ्य कर्मी अपनी तरफ से एंटी स्नेक वेनम नहीं लगाएंगे। मरीज को मौके पर देखने के बाद उसकी स्थिति और सर्पदंश से जुड़ी जानकारी के आधार पर चिकित्सक से फोन पर परामर्श लिया जाएगा। डॉक्टर की सलाह मिलने के बाद ही मरीज को एंटी स्नेक वेनम देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
इसके बाद मरीज को आगे के उपचार और निगरानी के लिए अस्पताल पहुंचाया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि इस व्यवस्था से सर्पदंश के मामलों में उपचार शुरू होने में लगने वाला महत्वपूर्ण समय कम किया जा सकेगा।
विशेषकर ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में सर्पदंश के बाद अस्पताल तक पहुंचने में देरी कई बार गंभीर स्थिति पैदा कर सकती है। ऐसे में एंबुलेंस में एंटी स्नेक वेनम की उपलब्धता आपातकालीन उपचार व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
इस संबंध में प्रदेश के सभी मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं।
प्रदीप ठाकुर, निदेशक, एनएचएम हिमाचल प्रदेश ने बताया कि सर्पदंश के मामलों में समय पर उपचार बेहद महत्वपूर्ण है और दूरदराज के क्षेत्रों में एंबुलेंस के स्तर पर यह सुविधा मरीजों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है।
