हिमाचल में पनीर के दाम को लेकर बड़ा खेल सामने आया है—सरकारी रेट 330 रुपये किलो, लेकिन बाजार में ग्राहकों से 440 रुपये तक वसूले जा रहे हैं।
धर्मशाला में एक ही इलाके की अलग-अलग दुकानों पर पनीर के भाव में भारी अंतर ने ग्राहकों की परेशानी बढ़ा दी है।
कांगड़ा। जिला मुख्यालय धर्मशाला में पनीर की कीमतों को लेकर उपभोक्ताओं में नाराजगी देखने को मिल रही है। विभाग की ओर से पनीर का निर्धारित रेट 330 रुपये प्रति किलो बताया जा रहा है, जबकि बाजार में कई दुकानों पर यही पनीर 400 से लेकर 440 रुपये प्रति किलो तक बेचा जा रहा है।
कचहरी क्षेत्र में पनीर की कीमतों में खासा अंतर देखने को मिला। अलग-अलग दुकानों पर इसके दाम में करीब 40 रुपये तक का फर्क सामने आया है। ऐसे में ग्राहकों के सामने यह असमंजस बना हुआ है कि आखिर उन्हें पनीर किस कीमत पर खरीदना चाहिए।
एनालॉग पनीर पर रोक के बाद बढ़ी मांग
हिमाचल में एनालॉग पनीर पर पाबंदी के बाद बाजार में दुग्ध पनीर की मांग बढ़ी है। कारोबारियों का कहना है कि अब कंपनियों की ओर से मुख्य रूप से दुग्ध पनीर ही उपलब्ध कराया जा रहा है। मांग बढ़ने और उपलब्धता में बदलाव के कारण इसकी कीमतों में भी इजाफा हुआ है।
धर्मशाला के अलग-अलग क्षेत्रों में हाल के दिनों में पनीर के भाव लगातार बढ़े हैं। दाड़ी क्षेत्र में जहां पहले दुग्ध पनीर करीब 320 रुपये किलो बिक रहा था, वहीं अब इसकी कीमत 360 रुपये तक पहुंच गई है। इसी तरह कचहरी क्षेत्र में 380 रुपये से बढ़कर कीमत 400 रुपये तक पहुंची और कुछ दुकानों पर यही पनीर 440 रुपये किलो तक बिक रहा है।
एक ही शहर में अलग-अलग रेट से ग्राहक परेशान
पनीर की कीमतों में बड़े अंतर ने आम उपभोक्ताओं की मुश्किल बढ़ा दी है। एक ही शहर में अलग-अलग दुकानों पर अलग-अलग कीमत चुकानी पड़ रही है। पहले से महंगाई की मार झेल रहे परिवारों के लिए पनीर के बढ़ते दाम घरेलू बजट पर अतिरिक्त बोझ डाल रहे हैं।
उपभोक्ता राकेश पठानिया ने कहा कि एनालॉग पनीर पर रोक के बाद दुग्ध पनीर की कीमत अचानक बढ़ी है और इसका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ रहा है। वहीं, ममता शर्मा के मुताबिक रसोई का बजट पहले ही लगातार बढ़ रहा है और पनीर महंगा होने से घर का खर्च संभालना और मुश्किल हो गया है।
ग्राहक संजय कुमार ने भी धर्मशाला में वस्तुओं की कीमतों को लेकर चिंता जताई। उनका कहना है कि यहां कई सामान अन्य क्षेत्रों की तुलना में महंगे मिलते हैं और लगातार बढ़ती महंगाई से आम आदमी की परेशानी बढ़ रही है।
अब सवाल यह है कि जब पनीर का निर्धारित रेट 330 रुपये प्रति किलो है, तो बाजार में 440 रुपये तक की कीमत कैसे पहुंच रही है और इस अंतर पर संबंधित विभाग की ओर से क्या कार्रवाई की जाती है।
