20% छूट का ऑफर पड़ा भारी! WhatsApp पर आई APK फाइल ने खोला साइबर ठगी का रास्ता, नाहन में महिला बाल-बाल बची
स्कूटी खरीदने के लिए इंटरनेट से नंबर तलाशना नाहन की एक महिला के लिए बड़ी मुसीबत बन सकता था। 20 प्रतिशत डिस्काउंट के लालच में भेजी गई संदिग्ध APK फाइल अगर मोबाइल में इंस्टॉल हो जाती, तो परिवार को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता था।
नाहन। साइबर ठग अब लोगों को फंसाने के लिए ऑनलाइन खरीदारी और आकर्षक डिस्काउंट ऑफर का सहारा ले रहे हैं। सिरमौर के नाहन के रानीताल क्षेत्र में सामने आया मामला इसका ताजा उदाहरण है, जहां एक महिला की सतर्कता और उसके पति की समय रहते नजर पड़ने से संभावित साइबर ठगी टल गई।
जानकारी के मुताबिक, रानीताल निवासी महिला नई एक्टिवा स्कूटी खरीदना चाहती थीं। इसके लिए उन्होंने इंटरनेट पर शोरूम का संपर्क नंबर खोजा और उस नंबर पर फोन किया। कॉल रिसीव नहीं होने के कुछ समय बाद उसी नंबर से महिला के पास वापस कॉल आई।
कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को स्कूटी शोरूम का कर्मचारी बताया। उसने महिला को बताया कि महिलाओं के लिए विशेष ऑफर चल रहा है और स्कूटी की कीमत पर करीब 20 प्रतिशत तक की छूट दी जा रही है। आकर्षक ऑफर सुनकर महिला से कथित कागजी प्रक्रिया पूरी करने के नाम पर उसका WhatsApp नंबर मांगा गया।
इसके बाद आरोपी ने महिला के WhatsApp पर एक .APK फाइल भेजी और उसे मोबाइल में इंस्टॉल करने के लिए कहा। महिला फाइल डाउनलोड करने ही वाली थीं कि उनके पति की नजर मोबाइल पर पड़ गई। बातचीत और संदिग्ध फाइल पर शक होने के बाद उन्होंने तुरंत महिला को फाइल डाउनलोड करने से रोक दिया।
पति ने जब फोन करने वाले व्यक्ति से इस संबंध में सवाल किए तो वह कथित तौर पर घबरा गया। कुछ देर बाद उसने अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया और फोन काट दिया। APK फाइल मोबाइल में डाउनलोड और इंस्टॉल नहीं होने के कारण परिवार संभावित साइबर ठगी से बच गया।
APK फाइल से क्यों रहें सावधान?
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, अनजान स्रोत से प्राप्त APK फाइल को मोबाइल में इंस्टॉल करना जोखिम भरा हो सकता है। ऐसी फाइल के जरिए साइबर अपराधी डिवाइस और उसमें मौजूद संवेदनशील जानकारी तक अनधिकृत पहुंच बनाने की कोशिश कर सकते हैं। बैंकिंग और निजी जानकारी से जुड़ा डेटा भी खतरे में पड़ सकता है।
ऑनलाइन नंबर तलाशते समय भी बरतें सावधानी
विशेषज्ञों की सलाह है कि किसी शोरूम, बैंक या कंपनी का संपर्क नंबर केवल Google सर्च या सोशल मीडिया पोस्ट के आधार पर इस्तेमाल करने से पहले उसकी आधिकारिक वेबसाइट या अधिकृत माध्यम से पुष्टि करें। अनजान व्यक्ति द्वारा भेजे गए किसी भी लिंक या APK फाइल को डाउनलोड या इंस्टॉल करने से बचें।
इसके अलावा, बाजार की तुलना में असामान्य रूप से ज्यादा डिस्काउंट, तुरंत भुगतान का दबाव और दस्तावेजी प्रक्रिया के नाम पर मोबाइल में कोई ऐप इंस्टॉल करवाने जैसी गतिविधियां साइबर ठगी का संकेत हो सकती हैं।
अगर साइबर ठगी हो जाए या ठगी का प्रयास सामने आए, तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं। समय पर सूचना देने से संभावित नुकसान को रोकने और ठगी गई रकम की रिकवरी की संभावना बढ़ सकती है।
