10वीं के सिर्फ दो साल बाद बीए? हिमाचल कोऑपरेटिव बैंक कर्मचारी की डिग्री की टाइमलाइन पर उठे सवाल
पंजाब यूनिवर्सिटी ने डिग्री को बताया सही, लेकिन 1989 में बीए परीक्षा के लिए पात्रता का आधार अब भी साफ नहीं
शिमला। हिमाचल प्रदेश स्टेट कोऑपरेटिव बैंक के एक कर्मचारी की शैक्षणिक योग्यता से जुड़े रिकॉर्ड की टाइमलाइन ने नई जांच का रास्ता खोल दिया है। उपलब्ध दस्तावेजों के मुताबिक कर्मचारी ने वर्ष 1987 में हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड से 10वीं की परीक्षा पास की, जबकि इसके करीब दो साल बाद अप्रैल 1989 में पंजाब यूनिवर्सिटी से बीए परीक्षा उत्तीर्ण करने का रिकॉर्ड सामने आया है।
दस्तावेजों के अनुसार पंजाब यूनिवर्सिटी ने 15 सितंबर 1989 को संबंधित कर्मचारी की बीए डिग्री जारी की थी। 10वीं पास करने और बीए परीक्षा उत्तीर्ण करने के बीच बेहद कम अंतर होने के कारण बैंक प्रबंधन ने डिग्री की प्रामाणिकता की आधिकारिक पुष्टि कराने का फैसला लिया।
इसी क्रम में हिमाचल प्रदेश स्टेट कोऑपरेटिव बैंक के प्रधान कार्यालय ने 20 जनवरी 2026 को पंजाब यूनिवर्सिटी के परीक्षा नियंत्रक को पत्र भेजकर संबंधित बीए डिग्री और परीक्षा रिकॉर्ड के सत्यापन की मांग की। विश्वविद्यालय की ओर से 4 फरवरी 2026 को गोपनीय पत्र के माध्यम से बैंक को जवाब भेजा गया।
सहायक कुलसचिव (प्रमाण पत्र) की ओर से जारी सत्यापन रिपोर्ट में कर्मचारी का रोल नंबर 42194 और पंजीकरण संख्या 88-ez-13858 दर्ज है। रिपोर्ट के मुताबिक संबंधित कर्मचारी ने बैचलर ऑफ आर्ट्स की परीक्षा रेग्यूलेशन 3.2 के तहत अप्रैल 1989 में पास की थी। विश्वविद्यालय का जवाब 9 फरवरी 2026 को बैंक के प्रधान कार्यालय में दर्ज किया गया।
विश्वविद्यालय ने डिग्री को बताया वैध
विश्वविद्यालय की सत्यापन रिपोर्ट में उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर बीए की डिग्री और परीक्षा रिकॉर्ड को वैध तथा “इन ऑर्डर” बताया गया है। यानी फिलहाल विश्वविद्यालय के रिकॉर्ड में डिग्री की प्रामाणिकता पर कोई सवाल दर्ज नहीं है।
हालांकि, मामला यहीं खत्म नहीं होता। उपलब्ध दस्तावेजों में यह स्पष्ट नहीं है कि वर्ष 1987 में 10वीं पास करने के बाद संबंधित कर्मचारी वर्ष 1989 में बीए परीक्षा में बैठने के लिए किस शैक्षणिक पात्रता के आधार पर योग्य हुआ था।
रेग्यूलेशन 3.2 ने बढ़ाई जांच की जरूरत
मामले में अब मुख्य सवाल बीए डिग्री के सही या गलत होने से अधिक उस समय लागू प्रवेश और शैक्षणिक पात्रता के नियमों को लेकर है। विश्वविद्यालय की रिपोर्ट में रेग्यूलेशन 3.2 का उल्लेख है, लेकिन उपलब्ध दस्तावेजों से यह स्पष्ट नहीं हो रहा कि इस रेग्यूलेशन के तहत 10वीं के बाद बीए परीक्षा में बैठने के लिए कोई विशेष पात्रता, समकक्षता या अन्य वैधानिक व्यवस्था उपलब्ध थी या नहीं।
आरटीआई के तहत 28 अगस्त 2026 को लोक सूचना अधिकारी से प्राप्त प्रमाणित दस्तावेजों के बाद यह सवाल और महत्वपूर्ण हो गया है। अब संबंधित समय के मूल प्रवेश रिकॉर्ड, पात्रता दस्तावेज और उस समय लागू विश्वविद्यालय नियमों की जांच से ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकती है।
बैंक ने कराया डिग्री का सत्यापन
हिमाचल प्रदेश स्टेट कोऑपरेटिव बैंक के प्रबंध निदेशक विनय सिंह ने कहा कि मामले की छानबीन के लिए पंजाब यूनिवर्सिटी से संबंधित डिग्री का सत्यापन कराया गया है। उनके मुताबिक विश्वविद्यालय ने उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर बीए डिग्री को सही और रिकॉर्ड को इन ऑर्डर बताया है। उन्होंने कहा कि मामले के अन्य पहलुओं की जांच की जा रही है।
ऐसे में उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर फिलहाल बीए डिग्री की प्रामाणिकता की पुष्टि हो चुकी है, लेकिन वर्ष 1989 में बीए परीक्षा के लिए कर्मचारी की शैक्षणिक पात्रता किस आधार पर बनी थी, यह सवाल अभी स्पष्ट नहीं हुआ है।
अब निगाह इस बात पर है कि संबंधित समय के विश्वविद्यालय नियम, रेग्यूलेशन 3.2 और मूल प्रवेश/पात्रता रिकॉर्ड क्या बताते हैं। इन्हीं दस्तावेजों से यह साफ होगा कि 1987 में 10वीं पास करने के बाद 1989 में बीए परीक्षा में बैठने की पात्रता किस नियम या व्यवस्था के तहत मिली थी।
