Home जनसरोकार हिमाचल: सिरमौर में बनेगा पहला एलिफेंट कॉरिडोर, खेतों को नुकसान से बचाने की तैयारी तेज

हिमाचल: सिरमौर में बनेगा पहला एलिफेंट कॉरिडोर, खेतों को नुकसान से बचाने की तैयारी तेज

by Dainik Janvarta
0 comment

हिमाचल में बनेगा प्रदेश का पहला एलिफेंट कॉरिडोर, सिरमौर में हाथियों के लिए तय होगा सुरक्षित रास्ता

पांवटा साहिब से नाहन तक बढ़ी जंगली हाथियों की आवाजाही ने वन विभाग की चिंता बढ़ा दी है। अब हाथियों और किसानों के बीच टकराव रोकने के लिए सिरमौर में प्रदेश का पहला एलिफेंट कॉरिडोर विकसित करने की तैयारी शुरू हो गई है।

नाहन/पांवटा साहिब (सिरमौर)। उत्तराखंड के राजाजी नेशनल पार्क से निकलकर सिरमौर की सीमा में प्रवेश करने वाले जंगली हाथियों के लिए अब सुरक्षित प्राकृतिक रास्ता तैयार करने की कवायद शुरू हो गई है। वन विभाग प्रदेश के पहले एलिफेंट कॉरिडोर के लिए प्रस्ताव तैयार कर रहा है। इसका उद्देश्य हाथियों की आवाजाही को सुरक्षित बनाना और मानव-हाथी संघर्ष को कम करना है, ताकि किसानों की फसलों को भी नुकसान से बचाया जा सके।

वन विभाग की ओर से तैयार किए जा रहे प्रस्ताव को पहले राज्य स्तर पर मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। इसके बाद अंतिम स्वीकृति के लिए इसे केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के समक्ष रखा जाएगा।

पांवटा से नाहन तक बढ़ी हाथियों की गतिविधियां

सिरमौर में जंगली हाथियों का पहुंचना नया मामला नहीं है। पिछले कई वर्षों से यमुना नदी का जलस्तर कम होने पर उत्तराखंड की ओर से हाथी सिरमौर की सीमा में प्रवेश करते रहे हैं। पहले इनकी गतिविधियां मुख्य रूप से बातामंडी, बहराल और सतीवाला क्षेत्रों तक सीमित रहती थीं।

इन इलाकों में हाथी कई बार गन्ने और धान की फसलों को नुकसान पहुंचाने के बाद वापस लौट जाते थे। अब स्थिति बदल रही है और हाथियों की आवाजाही पांवटा साहिब से आगे नाहन सीमा तक देखी जा रही है। इससे वन विभाग के सामने हाथियों के सुरक्षित आवागमन के साथ-साथ किसानों की फसलों की सुरक्षा की चुनौती भी बढ़ गई है।

डिजिटल मैपिंग से चिह्नित होंगे हाथियों के रास्ते

प्रस्तावित एलिफेंट कॉरिडोर के लिए वन विभाग आधुनिक तकनीक की मदद ले रहा है। हाथियों के पुराने और मौजूदा आवागमन मार्ग, उनके ठहरने के स्थान और उन क्षेत्रों की पहचान की जा रही है, जहां हाथी नियमित रूप से पहुंचते हैं।

जीपीएस और आधुनिक मैपिंग टूल्स के माध्यम से जुटाए जा रहे आंकड़ों को डिजिटल रूप में तैयार किया जाएगा। इससे हाथियों के वास्तविक मूवमेंट रूट की पहचान होगी और उसी आधार पर कॉरिडोर की भौगोलिक सीमा निर्धारित की जाएगी।

खेतों को नुकसान से बचाने पर भी रहेगा फोकस

एलिफेंट कॉरिडोर विकसित करने का मकसद केवल हाथियों का संरक्षण करना नहीं है, बल्कि मानव और हाथी के बीच होने वाले संघर्ष को कम करना भी है। सुरक्षित प्राकृतिक मार्ग मिलने से हाथियों की आबादी वाले क्षेत्रों में अनावश्यक आवाजाही कम होने और खेती वाले क्षेत्रों में उनके प्रवेश को नियंत्रित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

2024 में हिमाचल को मिला था प्रोजेक्ट एलिफेंट का दर्जा

हाथी संरक्षण की दिशा में हिमाचल प्रदेश को वर्ष 2024 में प्रोजेक्ट एलिफेंट के तहत नामित किया गया था। इसके बाद प्रदेश में हाथियों के संरक्षण और मानव-हाथी संघर्ष को कम करने के लिए प्रयास तेज हुए हैं।

वन विशेषज्ञों के अनुसार राजाजी नेशनल पार्क से सटे सिरमौर के जंगलों में पर्याप्त पानी, घना वन क्षेत्र और अनुकूल प्राकृतिक वातावरण हाथियों को आकर्षित करता है। इसी वजह से उत्तराखंड से निकलने वाले हाथियों की आवाजाही सिरमौर में लगातार बनी हुई है।

पांवटा साहिब के वन मंडलाधिकारी वेद प्रकाश शर्मा के अनुसार, एलिफेंट कॉरिडोर को मंजूरी मिलने के बाद हाथियों के संरक्षण के लिए केंद्र सरकार से विशेष आर्थिक सहायता मिलने की संभावना है।

हाथियों के हमले में दो लोगों की हो चुकी है मौत

सिरमौर में मानव-हाथी संघर्ष के गंभीर परिणाम भी सामने आ चुके हैं। वर्ष 2024 से अब तक हाथियों के हमले में दो लोगों की मौत हो चुकी है।

कोलर के समीप रात के समय हाथी के हमले में एक बुजुर्ग महिला की जान चली गई थी। वहीं, वर्ष 2024 में पानीवाला खाला-सैनवाला के पास एक जंगली हाथी ने शिलाई क्षेत्र के भेड़पालक पर हमला कर दिया था, जिसमें उसकी मौत हो गई थी।

ऐसे में प्रस्तावित एलिफेंट कॉरिडोर को हाथियों के संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय लोगों और किसानों की सुरक्षा की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

You may also like

Leave a Comment

About Us

दैनिक जनवार्ता एक निष्पक्ष और राष्ट्र के प्रति समर्पित वेब न्यूज़ पोर्टल है। हमारा उद्देश्य सच्ची, निर्भीक और संतुलित पत्रकारिता के माध्यम से भारत की एकता, अखंडता और संप्रभुता की रक्षा करना है। हम जाति, धर्म, लिंग, भाषा और संप्रदाय से ऊपर उठकर निष्पक्ष खबरें प्रस्तुत करते हैं। स्वैच्छिक संवाददाताओं की टीम के सहयोग से हम राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानते हुए विश्वसनीय सूचना जन-जन तक पहुँचाने का मिशन चला रहे हैं।

Contact for Design your website - 9318329982
Anshul Gupta
Software Engineer

@2023 – All Right Reserved. Designed and Developed DainikJanvarta

Adblock Detected

Please support us by disabling your AdBlocker extension from your browsers for our website.