बिलासपुर में सरकारी जमीन के रिकॉर्ड से छेड़छाड़ का आरोप, तत्कालीन तहसीलदार-पटवारी समेत 6 पर FIR
सरकारी जमीन पर कथित कब्जे को बचाने के लिए राजस्व रिकॉर्ड में हेरफेर का गंभीर आरोप सामने आया है। कोर्ट के आदेश के बाद पुलिस ने तत्कालीन तहसीलदार और पटवारी समेत छह लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
बिलासपुर। न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी झंडूता के आदेश के बाद पुलिस थाना झंडूता में सरकारी भूमि से जुड़े राजस्व रिकॉर्ड में कथित छेड़छाड़ और पुरानी फाइल गायब करने के आरोप में छह लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने यह एफआईआर एक सितंबर 2026 को दर्ज की है।
मामले में गांव खेड़ी निवासी तीन लोगों के साथ वर्ष 2016-17 में झंडूता में तैनात रहे तत्कालीन तहसीलदार और तत्कालीन रिकॉर्ड कीपर को भी आरोपी बनाया गया है। इसके अलावा वर्ष 2021 में पटवार हलका जेजवीं में तैनात पटवारी के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है।
2008 में सामने आया था सरकारी जमीन पर कब्जे का मामला
शिकायतकर्ता धनी राम निवासी गांव खेड़ी के अनुसार उनके दिवंगत भाई ने 9 सितंबर 2008 को उपायुक्त के समक्ष शिकायत देकर आरोप लगाया था कि गांव खेड़ी में खसरा नंबर 146/98 की करीब एक बीघा दस बिस्वा सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा किया गया है।
शिकायत मिलने के बाद राजस्व विभाग के पटवारी और कानूनगो ने मौके का निरीक्षण किया था। शिकायत के अनुसार जांच में सरकारी भूमि पर अतिक्रमण पाए जाने के बाद कब्जे को चिह्नित किया गया और आरोपियों को बेदखल करने की प्रक्रिया शुरू की गई।
यह मामला हिमाचल प्रदेश भू-राजस्व अधिनियम के तहत एसी प्रथम श्रेणी झंडूता की अदालत में पहुंचा था। इस बेदखली कार्रवाई से संबंधित मिसल नंबर 31/13 थी।
पुरानी मिसल गायब होने का आरोप
शिकायतकर्ता का आरोप है कि बाद में तहसील कार्यालय से इस मामले की मूल फाइल गायब हो गई। आरोप है कि जेजवीं पटवार हलका का लंबरदार रहे एक आरोपी ने तत्कालीन तहसीलदार और रिकॉर्ड कीपर के साथ कथित मिलीभगत कर पुरानी मिसल को गायब अथवा नष्ट करवाया।
शिकायतकर्ता के मुताबिक उसने मिसल नंबर 31/13 के संबंध में जानकारी हासिल करने के लिए कई बार तहसील कार्यालय के चक्कर लगाए, लेकिन हर बार उसे फाइल उपलब्ध नहीं होने की बात कही गई। उसे आश्वासन दिया गया कि फाइल मिलने पर इसकी सूचना दी जाएगी।
2021 में नई मिसल तैयार करने का आरोप
शिकायतकर्ता ने वर्ष 2019 में दोबारा उपायुक्त बिलासपुर के समक्ष मामला उठाया। आरोप है कि इसके बाद 13 अगस्त 2021 को मिसल नंबर 19/21 तैयार की गई।
शिकायत के अनुसार नई मिसल में पहले की कार्रवाई के दौरान दर्ज करीब एक बीघा दस बिस्वा सरकारी भूमि के कथित अतिक्रमण को घटाकर केवल दस बिस्वा दर्शाया गया। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि इस नई मिसल को तैयार करने में तत्कालीन पटवारी की भी भूमिका रही।
धनी राम का दावा है कि मौके पर कब्जा केवल दस बिस्वा सरकारी भूमि तक सीमित नहीं है, बल्कि दो बीघा से अधिक सरकारी जमीन पर कब्जे की स्थिति है। उनका आरोप है कि पुराने रिकॉर्ड को हटाकर और कब्जे का क्षेत्रफल कम दर्शाकर आरोपियों को अनुचित लाभ पहुंचाने का प्रयास किया गया।
शिकायत के बाद कोर्ट पहुंचा मामला
शिकायतकर्ता के अनुसार उसने 28 जनवरी 2026 को पुलिस और संबंधित अधिकारियों को लिखित शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की थी। आरोप है कि काफी समय बीतने के बावजूद जब पुलिस स्तर पर कार्रवाई नहीं हुई तो उसे न्यायालय की शरण लेनी पड़ी।
न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी झंडूता ने 31 अगस्त 2026 को मामले में पुलिस को एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए। अदालत के आदेश के बाद झंडूता पुलिस ने छह आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस जांच में अब यह स्पष्ट किया जाना है कि पुरानी मिसल कैसे गायब हुई, वर्ष 2021 में तैयार किए गए रिकॉर्ड में कथित बदलाव कैसे हुआ और सरकारी भूमि के कब्जे से संबंधित आरोपों में किसकी क्या भूमिका रही।
