हिमाचल: मंदिरों के चढ़ावे से होगा गरीबों का इलाज, जरूरतमंद बच्चों की फीस में भी मिलेगी मदद
अब मंदिरों में चढ़ने वाला पैसा सिर्फ धार्मिक व्यवस्थाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जरूरतमंद परिवारों के इलाज और बच्चों की पढ़ाई में भी काम आ सकेगा।
सरकार ने साफ किया है कि शक्तिपीठों और बड़े मंदिरों में जमा चढ़ावे की राशि का इस्तेमाल गरीबों की मदद के लिए कानूनी प्रावधानों के तहत किया जा सकेगा।
शिमला। हिमाचल प्रदेश में मंदिरों में श्रद्धालुओं की ओर से चढ़ावे के रूप में जमा होने वाली राशि के उपयोग को लेकर सरकार ने महत्वपूर्ण जानकारी दी है। प्रदेश के शक्तिपीठों और बड़े मंदिरों में उपलब्ध धनराशि से गरीब और जरूरतमंद लोगों के इलाज तथा जरूरतमंद बच्चों की स्कूल फीस में सहायता की जा सकेगी।
उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने विधानसभा में यह जानकारी दी। वह श्री चिंतपूर्णी जी के विधायक सुदर्शन बबलू की ओर से शून्यकाल के दौरान उठाए गए मामले का जवाब दे रहे थे।
विधि विभाग से मांगी गई थी राय
मंदिरों के चढ़ावे की राशि के इस्तेमाल को लेकर न्यायालय के फैसले के बाद प्रदेश सरकार ने विधि विभाग से राय मांगी थी। विधि विभाग की रिपोर्ट में कहा गया है कि मंदिरों में उपलब्ध चढ़ावे की राशि का इस्तेमाल पात्र गरीब और जरूरतमंद परिवारों की सहायता के लिए किया जा सकता है।
इसके तहत गरीब लोगों के उपचार के साथ-साथ जरूरतमंद परिवारों के बच्चों की स्कूल फीस में भी आर्थिक मदद की जा सकेगी। संबंधित जिलों के उपायुक्त अपने क्षेत्र में पात्र परिवारों की पहचान कर सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया में भूमिका निभा सकेंगे।
विज्ञापन और वाहन खरीद पर रोक
उप मुख्यमंत्री ने बताया कि न्यायालय के आदेश के तहत मंदिरों की धनराशि का उपयोग विज्ञापन जारी करने तथा मंदिर न्यास के अधिकारियों के लिए वाहन खरीदने जैसे कार्यों में नहीं किया जा सकता।
उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस धन का उपयोग जनहित और जरूरतमंद लोगों की सहायता के लिए किया जाना चाहिए। सरकार इस दिशा में सभी कदम कानूनी प्रावधानों के अनुरूप उठाएगी।
हाईकोर्ट में रिव्यू पिटीशन दायर करेगी सरकार
मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार इस मामले में उच्च न्यायालय के समक्ष रिव्यू पिटीशन भी दायर करेगी। सरकार न्यायालय के आदेश और विधि विभाग की रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई करेगी।
सरकार का रुख स्पष्ट है कि मंदिरों की चढ़ावे की राशि का इस्तेमाल जनकल्याण से जुड़े कार्यों में किया जाए, लेकिन इसके लिए न्यायालय के आदेश और लागू कानूनी प्रावधानों का पालन अनिवार्य होगा।
