हिमाचल में कर्मचारी-पेंशनर आंदोलन का बड़ा ऐलान, 1 और 2 सितंबर को शिमला में शक्ति प्रदर्शन
शिमला। शिमला में लगातार दो दिन सरकार के खिलाफ बड़ा शक्ति प्रदर्शन होने जा रहा है। एक सितंबर को 25 हजार पेंशनर जुटेंगे, तो दो सितंबर को बिजली कर्मचारी विधानसभा घेराव की तैयारी में हैं।
पेंशनरों का ‘हमारा पैसा, हमारा हक’ आंदोलन
हिमाचल प्रदेश में लंबित वित्तीय देनदारियों को लेकर पेंशनरों ने आंदोलन तेज करने का फैसला लिया है। पेंशनर्स संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले आंदोलन के तीसरे चरण की शुरुआत करते हुए एक सितंबर को शिमला में विशाल विरोध प्रदर्शन और रैली का ऐलान किया गया है।
समिति के अतिरिक्त महासचिव भूप राम वर्मा के अनुसार, एक सितंबर को आंबेडकर चौक-चौड़ा मैदान में होने वाले प्रदर्शन में प्रदेशभर से करीब 25 हजार पेंशनरों को जुटाने का लक्ष्य रखा गया है। जिला स्तर पर भी पेंशनरों को शिमला पहुंचाने की तैयारियां की जा रही हैं।
समिति का कहना है कि यह आंदोलन किसी अतिरिक्त सुविधा की मांग के लिए नहीं, बल्कि लंबे समय से लंबित वित्तीय अधिकारों के भुगतान के लिए है। पेंशनरों की प्रमुख मांगों में वर्ष 2016 से लंबित महंगाई भत्ते (डीए) के एरियर का भुगतान, संशोधित वेतनमान के बकाये की पूरी राशि एकमुश्त जारी करना और अन्य लंबित वित्तीय देनदारियों का निपटारा शामिल है।
इसके अलावा चिकित्सा प्रतिपूर्ति के लंबित बिलों का भुगतान भी जल्द करने की मांग उठाई गई है। पेंशनर नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने मांगों पर गंभीरता से कार्रवाई नहीं की तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। समिति ने पेंशनरों और सेवानिवृत्त कर्मचारियों से एक सितंबर को परिजनों सहित शिमला पहुंचने की अपील की है।
2 सितंबर को बिजली कर्मचारी करेंगे विधानसभा घेराव
पेंशनरों के प्रदर्शन के अगले ही दिन 2 सितंबर को हिमाचल प्रदेश स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड एम्प्लाइज यूनियन (एचपीएसईबीएल) ने प्रदेशव्यापी हड़ताल और विधानसभा घेराव का ऐलान किया है। आंदोलन को सफल बनाने के लिए बिलासपुर के घुमारवीं में यूनियन की बैठक आयोजित कर रणनीति तैयार की गई।
बैठक की अध्यक्षता जिला बिलासपुर प्रधान एवं राज्य मुख्य सलाहकार यशवंत चौहान बिट्टू ने की। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों और पेंशनरों की लंबित मांगों को लेकर यूनियन लंबे समय से सरकार और बिजली बोर्ड प्रबंधन के समक्ष आवाज उठा रही है, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के कारण अब प्रदेश स्तर पर आंदोलन का निर्णय लिया गया है।
उन्होंने कर्मचारियों से दो सितंबर को अधिक से अधिक संख्या में शिमला पहुंचने और आंदोलन को सफल बनाने का आह्वान किया।
ये हैं बिजली कर्मचारियों की प्रमुख मांगें
यूनियन की ओर से उठाई जा रही प्रमुख मांगों में मुख्यमंत्री की घोषणाओं को लागू करना, पदोन्नति पर कैडर-कंट्रोलिंग अथॉरिटी बनाना और आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए स्थायी नीति बनाना शामिल है।
इसके साथ ही सेवानिवृत्ति लाभों का समयबद्ध भुगतान, ताज मोहम्मद मामले में न्यायालय के फैसले को लागू करना, स्मार्ट मीटर नीति की समीक्षा, नॉन-आईटीआई फील्ड स्टाफ की पदोन्नति में भेदभाव खत्म करना और शिमला-2 में एएलएम-एलएम पदों का सृजन करने की मांग भी की गई है।
यूनियन पदाधिकारियों के अनुसार मांगपत्र सरकार और बिजली बोर्ड के शीर्ष प्रबंधन को पहले ही सौंपा जा चुका है। मांगों पर समाधान नहीं होने के बाद अब आंदोलन का रास्ता अपनाया गया है।
बिलासपुर जिला इकाई ने आंदोलन की तैयारियों को तेज करते हुए सेक्शन, डिवीजन और सब-डिविजन स्तर पर कर्मचारियों से संपर्क अभियान शुरू कर दिया है। बैठक में डिवीजन घुमारवीं के एक्सईएन करण चंदेल सहित यूनियन के कई पदाधिकारी और महिला टीम की सदस्य भी मौजूद रहीं।
इस तरह हिमाचल में सितंबर के पहले दो दिनों में कर्मचारी और पेंशनर संगठनों के दो बड़े आंदोलन प्रस्तावित हैं। अब सभी की नजरें इस बात पर रहेंगी कि सरकार इन आंदोलनों से पहले या इनके बाद लंबित मांगों पर क्या कदम उठाती है।
