शिमला में चिट्टा तस्करी के अंतरराज्यीय नेटवर्क पर बड़ा वार, 3 आरोपी गिरफ्तार; अबू धाबी भागने की तैयारी में था एक तस्कर
सिग्नल एप पर संपर्क, हाई ग्रेड हेरोइन की बड़ी खेप और एनएच-705 पर छिपाकर रखी जाती थीं चिट्टे की पुड़ियां—शिमला पुलिस की जांच में नशा तस्करी के अंतरराज्यीय नेटवर्क की परतें खुलती गईं।
पुलिस ने तीन अलग-अलग मामलों में तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर पंजाब, हरियाणा और हिमाचल से जुड़े सप्लाई नेटवर्क की अहम कड़ियां जोड़ दी हैं।
शिमला। शिमला पुलिस ने नशे के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए चिट्टा और हेरोइन की तस्करी से जुड़े तीन अलग-अलग मामलों में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस जांच में सामने आया है कि इन मामलों के तार हिमाचल प्रदेश के अलावा पंजाब और हरियाणा तक फैले हुए हैं। शनिवार को अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मेहर पंवार ने पत्रकार वार्ता में कार्रवाई और जांच से जुड़े अहम खुलासे किए।
शोघी के पास 1.120 किलो हाई ग्रेड चिट्टा बरामद
पहले मामले में शिमला पुलिस के स्पेशल सेल ने 3 अगस्त 2026 को शोघी के समीप 1.120 किलोग्राम हाई ग्रेड चिट्टा (हेरोइन) बरामद कर विजय कुमार को गिरफ्तार किया था। जांच को आगे बढ़ाते हुए पुलिस ने खेप के बैकवर्ड लिंक खंगाले।
पूछताछ और तकनीकी साक्ष्यों से सामने आया कि यह खेप पंजाब के तरनतारन निवासी शुभकरमन सिंह उर्फ सुल्तान ने उपलब्ध करवाई थी। पुलिस ने उसे पहले ही गिरफ्तार कर लिया था। इसके बाद जांच में हरियाणा के अंबाला जिले के नारायणगढ़ निवासी आजाद सिंह की भूमिका सामने आई।
पुलिस के अनुसार, दबिश की भनक लगने के बाद आजाद फरार हो गया था। उसने पासपोर्ट और टूरिस्ट वीजा भी बनवा लिया था और अबू धाबी जाने की तैयारी में था। तकनीकी निगरानी के दौरान उसकी लोकेशन गुजरात के अहमदाबाद में मिली।
इसके बाद शिमला पुलिस ने गुजरात पुलिस के साथ संयुक्त कार्रवाई की और आजाद सिंह को अहमदाबाद एयरपोर्ट से अबू धाबी रवाना होने से पहले गिरफ्तार कर लिया। अहमदाबाद की अदालत से ट्रांजिट रिमांड लेने के बाद उसे शिमला लाया गया, जहां अदालत से तीन दिन का पुलिस रिमांड हासिल किया गया।
सिग्नल एप से होती थी तस्करों की बातचीत
पुलिस जांच में एक अहम बात यह भी सामने आई कि विजय कुमार, शुभकरमन सिंह और आजाद सिंह आपस में संपर्क के लिए Signal App का इस्तेमाल करते थे।
जांच के मुताबिक, शुभकरमन की ओर से उपलब्ध कराई गई हेरोइन की खेप आजाद सिंह के माध्यम से विजय कुमार तक पहुंचाई गई थी। शिमला पुलिस ने इसी खेप को बीच में इंटरसेप्ट कर बरामद किया था।
आजाद की गिरफ्तारी के बाद इस मामले में गिरफ्तार आरोपियों की संख्या तीन हो गई है। पुलिस ने आरोपियों के आपराधिक रिकॉर्ड और अन्य संपर्कों की भी जांच शुरू कर दी है।
एनएच-705 पर छिपाई जाती थीं चिट्टे की खेप
दूसरे मामले में पुलिस थाना जुब्बल ने हिमाचल, पंजाब और हरियाणा से जुड़े एक अन्य अंतरराज्यीय चिट्टा सप्लाई नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। इस मामले में पुलिस ने नेटवर्क के मुख्य तस्कर सन्नी सिंह को अंबाला से गिरफ्तार किया है।
मामले की शुरुआत 15 जुलाई 2026 को हुई थी। उस दौरान पुलिस ने घुमारवीं, बिलासपुर निवासी रविंद्र कुमार के कब्जे से 9.57 ग्राम चिट्टा बरामद किया था। रिमांड के दौरान रविंद्र ने पुलिस को बताया कि उसने यह चिट्टा पंजाब के जीरकपुर में सन्नी सिंह से लिया था।
जांच में पता चला कि तस्करों ने चिट्टे की डिलीवरी के लिए लोकेशन आधारित तरीका अपनाया था। एनएच-705 पर सनाभा, खड़ापत्थर से लेकर सरस्वती नगर तक अलग-अलग जगहों पर चिट्टे की खेप छिपाई जाती थी। इन स्थानों की जानकारी व्हाट्सएप के जरिए साझा की जाती थी।
13 जगहों से 14.53 ग्राम चिट्टा बरामद
रविंद्र कुमार की निशानदेही पर पुलिस ने 13 अलग-अलग स्थानों से कुल 14.53 ग्राम चिट्टा बरामद किया। इस मामले में अब तक कुल 24.10 ग्राम चिट्टा बरामद हो चुका है।
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार सन्नी सिंह का आपराधिक इतिहास भी सामने आया है। उसके खिलाफ हरियाणा, पंजाब और हिमाचल प्रदेश में चिट्टा तस्करी से जुड़े कुल सात मामले दर्ज हैं। पंचकूला के सेक्टर-20 थाना क्षेत्र में दर्ज एक एनडीपीएस मामले में भी उसके कब्जे से 304 ग्राम चिट्टा बरामद किया गया था।
जांच में रविंद्र कुमार की एक अन्य मामले में भूमिका भी सामने आई है, जिसमें उस पर मोहित कुमार को चिट्टा सप्लाई करने का आरोप है।
चिट्टा तस्करी का मुख्य सरगना करण भी गिरफ्तार
तीसरे मामले में पुलिस थाना सदर शिमला ने लंबे समय से फरार चल रहे आरोपी करण को गिरफ्तार किया है। करण पुत्र चंचल कुमार पंजाब के अमृतसर का रहने वाला है और पुलिस के अनुसार उसे चिट्टा तस्करी नेटवर्क का मुख्य सरगना माना जा रहा है।
यह मामला 25 दिसंबर 2025 को सामने आया था। उस समय अंकुश उर्फ सुदामा के कब्जे से 6.360 ग्राम चिट्टा बरामद हुआ था। पूछताछ में अंकुश ने बताया था कि उसे चिट्टा सागर से मिला था। इसके बाद पुलिस ने अंकुश उर्फ सुदामा, प्रवीण चौहान उर्फ बाबी और सागर को गिरफ्तार किया था।
मामले की वित्तीय जांच के दौरान पुलिस को सागर की ओर से करण के एचडीएफसी बैंक खाते सहित अन्य खातों में करीब 3 लाख रुपये के लेन-देन का पता चला। इस वित्तीय कड़ी ने पुलिस को करण तक पहुंचने में महत्वपूर्ण मदद की।
लगातार जांच और तलाश के बाद पुलिस ने करण को 25 अगस्त 2026 को गिरफ्तार कर लिया।
सप्लाई नेटवर्क की जड़ों तक पहुंचने में जुटी पुलिस
तीनों मामलों की जांच में पुलिस को नशा तस्करी के ऐसे नेटवर्क के संकेत मिले हैं, जो अलग-अलग राज्यों में फैले हुए हैं। पुलिस अब आरोपियों के मोबाइल संपर्क, डिजिटल कम्युनिकेशन, बैंक लेन-देन और सप्लाई चैन की कड़ियों को खंगाल रही है, ताकि नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों तक भी पहुंचा जा सके।
पुलिस का कहना है कि नशे के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा और चिट्टा सप्लाई करने वाले नेटवर्क की जड़ों तक पहुंचने के लिए तकनीकी और वित्तीय जांच को और तेज किया जाएगा।
