हिमाचल: शिमला में टैक्सी ऑपरेटरों की हड़ताल खत्म, जयराम ठाकुर ने जूस पिलाकर समाप्त कराया धरना
शिमला। शिमला के चौड़ा मैदान में परमिट अवधि बढ़ाने की मांग को लेकर चल रहा टैक्सी ऑपरेटरों का आंदोलन आखिरकार खत्म हो गया। धरनास्थल पर पहुंचे नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने ऑपरेटरों से बातचीत के बाद उन्हें जूस पिलाकर धरना समाप्त कराया।
लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे टैक्सी ऑपरेटरों ने बातचीत के बाद हड़ताल खत्म करने पर सहमति जताई। ऑपरेटरों की प्रमुख मांग परमिट अवधि को बढ़ाने के साथ-साथ फिटनेस के आधार पर वाहनों को संचालन की अनुमति देना है।
चौड़ा मैदान में चल रहा था धरना
शिमला के चौड़ा मैदान में टैक्सी ऑपरेटर परमिट अवधि बढ़ाने की मांग को लेकर धरने पर बैठे थे। ऑपरेटरों का कहना था कि मौजूदा परमिट व्यवस्था के कारण बड़ी संख्या में व्यावसायिक वाहन प्रभावित हो रहे हैं। इससे टैक्सी चालकों और ऑपरेटरों की आजीविका पर भी असर पड़ रहा है।
आंदोलन के दौरान ऑपरेटरों ने अपनी मांगों को सरकार के सामने उठाया और परमिट व्यवस्था में व्यावहारिक बदलाव की मांग की।
जयराम ठाकुर ने की बातचीत, जूस पिलाकर खत्म कराया धरना
पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर धरनास्थल पर पहुंचे और टैक्सी ऑपरेटरों से बातचीत की। उन्होंने उनकी समस्याओं और मांगों को सुना तथा आंदोलन समाप्त करने की अपील की।
बातचीत के बाद ऑपरेटरों ने धरना खत्म करने पर सहमति जताई। इसके बाद जयराम ठाकुर ने टैक्सी ऑपरेटरों को जूस पिलाकर उनका धरना समाप्त कराया। इसके साथ ही चौड़ा मैदान में चल रहा आंदोलन फिलहाल खत्म हो गया।
विधानसभा में उठाया मुद्दा, केंद्र के सामने भी रखेंगे मांग
धरना समाप्त करवाने के बाद जयराम ठाकुर ने कहा कि टैक्सी ऑपरेटरों की परमिट अवधि से जुड़ी मांग को उन्होंने विधानसभा में भी प्रमुखता से उठाया है। उन्होंने कहा कि अब इस मामले को केंद्र सरकार के समक्ष भी रखा जाएगा, ताकि ऑपरेटरों को राहत मिल सके।
उन्होंने कहा कि यह मामला केवल टैक्सी कारोबार तक सीमित नहीं है, बल्कि हजारों परिवारों की रोजी-रोटी इससे जुड़ी हुई है। ऐसे में सरकार को ऑपरेटरों की व्यावहारिक परेशानियों को ध्यान में रखते हुए सकारात्मक निर्णय लेना चाहिए।
परमिट अवधि 12 से बढ़ाकर 15 साल करने की मांग
टैक्सी ऑपरेटरों की प्रमुख मांग परमिट की अवधि को 12 साल से बढ़ाकर 15 साल करना है। इसके अलावा वे चाहते हैं कि परमिट अवधि पूरी होने के बाद भी यदि वाहन फिटनेस मानकों पर खरा उतरता है तो उसे सड़क पर चलाने की अनुमति दी जाए।
ऑपरेटरों ने बस, ट्रक, ऑटो, मालवाहक और अन्य व्यावसायिक वाहनों की परमिट व्यवस्था में भी बदलाव की मांग उठाई है। उनका तर्क है कि अन्य राज्यों में व्यावसायिक वाहनों को अपेक्षाकृत अधिक अवधि तक संचालन की अनुमति मिलती है, इसलिए हिमाचल में भी ऐसी व्यावहारिक व्यवस्था लागू की जानी चाहिए।
हजारों ऑपरेटरों और चालकों की रोजी-रोटी का मुद्दा
टैक्सी ऑपरेटरों का कहना है कि परमिट अवधि पूरी होने से सीधे तौर पर हजारों वाहन मालिकों और चालकों की आजीविका प्रभावित हो सकती है। इसलिए उन्होंने सरकार से मांग की है कि वाहन की उम्र को ही आधार बनाने के बजाय उसकी फिटनेस और सुरक्षा मानकों को प्राथमिकता दी जाए।
ऑपरेटरों की मांग है कि प्रदेश में सभी टैक्सी और अन्य व्यावसायिक वाहनों के लिए समान, स्पष्ट और व्यावहारिक परमिट व्यवस्था बनाई जाए।
