कालाअंब-पांवटा हाईवे पर ट्रालों का आतंक, लोगों ने रात 11 से सुबह 6 बजे तक चलाने की मांग की
कालाअंब-पांवटा साहिब NH-07 पर ओवरलोड ट्रालों के कारण लग रहे जाम और हादसों से लोग परेशान हैं। स्कूली बच्चों से लेकर कर्मचारियों तक की सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंता के बीच क्षेत्रवासियों ने प्रशासन से ट्रालों के संचालन का समय रात 11 बजे से सुबह 6 बजे तक निर्धारित करने की मांग उठाई है।
नाहन (सिरमौर)। कालाअंब-पांवटा साहिब राष्ट्रीय राजमार्ग-07 पर डंपर और ट्रालों की आवाजाही लोगों के लिए परेशानी का कारण बनती जा रही है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि ओवरलोड ट्रालों के कारण आए दिन हाईवे पर घंटों जाम लग रहा है, जिससे स्कूली बच्चों, कर्मचारियों, राहगीरों और स्थानीय लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
कालाअंब, मैनथापल, मोगीनंद, सैनवाला, बिक्रमबाग, शंभूवाला और आसपास के गांवों के लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि इन डंपर और ट्रालों के संचालन का समय निर्धारित किया जाए। लोगों ने सुझाव दिया है कि इन्हें केवल रात्रि 11 बजे से सुबह 6 बजे तक ही चलने की अनुमति दी जाए।
क्षेत्रवासियों के अनुसार, ओवरलोड ट्रालों की वजह से NH-07 पर कई बार यातायात व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो जाती है। जाम में स्कूली बसें भी घंटों फंस जाती हैं, जिनमें छोटे बच्चे होते हैं। इससे अभिभावकों में भी बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी रहती है।
लोगों का कहना है कि राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे कई स्कूल स्थित हैं, जहां बड़ी संख्या में बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। सुबह और दोपहर के समय ट्रालों की आवाजाही के कारण बच्चों की सुरक्षा को लेकर हमेशा डर बना रहता है। इसके अलावा नौकरीपेशा लोगों और अन्य राहगीरों को भी हाईवे पर सफर करते समय अनहोनी की आशंका रहती है।
क्षेत्र के संदीप, मनीष, योगेश, दिनेश, संजय कुमार, विक्रम सिंह, राजिंद्र, मनदीप, पंकज, गीता राम, राकेश ठाकुर, देवराज सिंह, मनोज, रोहित शर्मा, बलदेव सिंह और सतपाल ने बताया कि पांवटा साहिब से कालाअंब तक ओवरलोड ट्रालों की वजह से हर समय हादसे का खतरा बना रहता है।
उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि नागरिक सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को प्राथमिकता देते हुए ट्रालों के संचालन का समय तय किया जाए। साथ ही, ओवरलोडिंग करने वाले वाहनों के खिलाफ नियमित रूप से कानूनी कार्रवाई और सख्त जांच सुनिश्चित की जाए, ताकि हाईवे पर जाम और हादसों की समस्या पर अंकुश लगाया जा सके।
