हिमाचल में औषधीय भांग की खेती का लाइसेंस अब 1 लाख रुपये प्रति बीघा, सरकार ने घटाई फीस
हिमाचल प्रदेश में अब दवा और वैज्ञानिक उपयोग के लिए भांग की खेती करना पहले के मुकाबले सस्ता होगा। सरकार ने लाइसेंस शुल्क में बड़ी कटौती करते हुए किसानों और निवेशकों के लिए रास्ता आसान कर दिया है।
शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार ने औषधीय एवं वैज्ञानिक उपयोग के लिए नियंत्रित भांग की खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लाइसेंस शुल्क में बड़ा बदलाव किया है। राज्य कर एवं आबकारी विभाग की ओर से अधिसूचित दूसरे संशोधन नियम 2026 के तहत खेती का लाइसेंस शुल्क तीन लाख रुपये से घटाकर एक लाख रुपये प्रति बीघा कर दिया गया है। वहीं भांग के प्रसंस्करण और विनिर्माण इकाइयों का वार्षिक लाइसेंस शुल्क दो करोड़ से घटाकर एक करोड़ रुपये किया गया है।
सरकार का यह कदम ऐसे समय आया है जब पहले निर्धारित ऊंची फीस के कारण किसानों और संभावित निवेशकों की रुचि सीमित रही थी। संशोधित शुल्क व्यवस्था का उद्देश्य औषधीय भांग की नियंत्रित खेती, प्रसंस्करण और इससे जुड़े उद्योगों को प्रोत्साहित करना है।
न्यूनतम पांच बीघा क्षेत्र और बाय-बैक एग्रीमेंट जरूरी
संशोधित नियमों के अनुसार व्यावसायिक औषधीय भांग की खेती के लिए कम से कम पांच बीघा का एकीकृत क्षेत्र होना जरूरी होगा। किसान को लाइसेंस प्राप्त करने से पहले किसी अधिकृत निर्माता या कंपनी के साथ बाय-बैक एग्रीमेंट भी करना होगा। इससे उत्पादित फसल की खरीद पहले से सुनिश्चित रहेगी और किसानों को बाजार में फसल बेचने को लेकर अनिश्चितता कम होगी।
सरकार का मानना है कि नियंत्रित खेती से औषधीय उत्पादों के अलावा कॉस्मेटिक्स, टेक्सटाइल, अनुसंधान और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में भी नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
बीजों और खेती की होगी कड़ी निगरानी
भांग की खेती की निगरानी के लिए कृषि विभाग के कृषि विकास अधिकारी (एडीओ) या उससे ऊपर के अधिकारी को नोडल अधिकारी बनाया जाएगा। बीजों की गुणवत्ता पर भी निगरानी रहेगी। बीज आपूर्तिकर्ताओं को प्रयोगशाला से जारी गुणवत्ता प्रमाणपत्र देना होगा।
किसान को खेती शुरू करने से कम से कम 21 दिन पहले बीज और अन्य जरूरी दस्तावेजों की जानकारी नोडल अधिकारी को देनी होगी। अधिकृत बीज आपूर्तिकर्ता के लाइसेंस का शुल्क 25 हजार रुपये और नवीनीकरण शुल्क भी 25 हजार रुपये रखा गया है।
भंडारण और परिवहन के लिए अलग शुल्क
संशोधित व्यवस्था में भांग के भंडारण लाइसेंस के लिए 10 हजार रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है। अनुसंधान एवं विश्लेषणात्मक परीक्षण के लाइसेंस के लिए एक लाख रुपये तथा चिकित्सा और वैज्ञानिक उपयोग के लिए उत्पादित भांग के परिवहन हेतु ट्रांसपोर्ट परमिट के लिए 2 हजार रुपये शुल्क तय किया गया है।
औद्योगिक भांग की खेती भी होगी सस्ती
औद्योगिक उपयोग के लिए भांग की खेती के शुल्क में भी बड़ी कटौती की गई है। अब औद्योगिक भांग उगाने के लिए लाइसेंस शुल्क 500 रुपये प्रति बीघा होगा, जबकि पहले यह 2 हजार रुपये था।
वहीं औद्योगिक भांग से जुड़े उत्पादों के निर्माण और प्रोसेसिंग के लिए वार्षिक लाइसेंस शुल्क 10 लाख रुपये से घटाकर 5 लाख रुपये कर दिया गया है।
संशोधित नियमों में औद्योगिक उपयोग के लिए भांग की खेती को पहले के सीमित अधिसूचित क्षेत्रों से आगे बढ़ाने की दिशा में भी प्रावधान किए गए हैं। सरकार का उद्देश्य इस क्षेत्र में किसानों और उद्योगों की भागीदारी बढ़ाना है।
हिमाचल प्रदेश औद्योगिक भांग की खेती को बढ़ावा देने वाला देश का तीसरा राज्य बनने की दिशा में है। इससे पहले उत्तराखंड और असम में औद्योगिक भांग की खेती का प्रयोग किया जा रहा है।
महत्वपूर्ण: यह व्यवस्था नियंत्रित और लाइसेंस आधारित खेती के लिए है। बिना वैध अनुमति भांग की खेती करना इस संशोधन से वैध नहीं हो जाता।
