शिक्षा विभाग सख्त: हिमाचल के सभी सरकारी स्कूलों में अब उबला या फिल्टर पानी ही मिलेगा
कुल्लू के स्कूल में खीर खाने के बाद छात्रों के बीमार पड़ने की घटना ने शिक्षा विभाग की चिंता बढ़ा दी है। मानसून में जलजनित बीमारियों के खतरे को देखते हुए अब प्रदेशभर के सरकारी स्कूलों में बच्चों के पीने के पानी को लेकर सख्त व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।
शिमला। कुल्लू जिले के प्राथमिक स्कूल बाड़ी में मिड-डे मील के दौरान खीर खाने के बाद कई विद्यार्थियों के बीमार पड़ने की घटना के बाद शिक्षा विभाग ने प्रदेश के सभी सरकारी स्कूलों को पेयजल और स्वच्छता व्यवस्था को लेकर विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। विभाग ने मानसून के दौरान दूषित पानी से होने वाली बीमारियों की रोकथाम के लिए स्कूल स्तर पर तत्काल एहतियाती कदम उठाने को कहा है।
स्कूल शिक्षा निदेशालय की ओर से सभी उपनिदेशकों, प्रधानाचार्यों और मुख्याध्यापकों को निर्देश जारी किए गए हैं कि विद्यार्थियों को सिर्फ सुरक्षित, फिल्टर किया हुआ या उबला हुआ पानी ही पीने के लिए उपलब्ध कराया जाए।
निर्देशों के मुताबिक जिन सरकारी स्कूलों में आरओ या वाटर प्यूरीफायर खराब पड़े हैं, वहां स्कूल निधि से उनकी तत्काल मरम्मत करवाई जाए। आवश्यकता होने पर नए वाटर प्यूरीफायर की व्यवस्था करने के लिए भी स्कूल स्तर पर कदम उठाने को कहा गया है।
विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि किसी स्कूल में सुरक्षित पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है, तो विद्यार्थियों को घर से उबला हुआ पानी लाने की सलाह दी जा सकती है। साथ ही स्कूल प्रबंधन को पानी की स्वच्छता और विद्यार्थियों के स्वास्थ्य को लेकर विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।
निदेशक स्कूल शिक्षा आशीष कोहली के अनुसार, 18 अगस्त को कुल्लू के जीपीएस बाड़ी स्कूल में मिड-डे मील के तहत परोसी गई खीर खाने के बाद कई विद्यार्थी बीमार हुए थे। प्रारंभिक जांच में बच्चों की तबीयत खराब होने के पीछे दूषित पानी की आशंका सामने आई है।
इसी घटना को देखते हुए शिक्षा विभाग ने प्रदेशभर के सरकारी स्कूलों को मानसून के दौरान पेयजल स्रोतों, पानी की गुणवत्ता और स्वच्छता व्यवस्था पर विशेष ध्यान देने को कहा है, ताकि विद्यार्थियों को जलजनित संक्रमण से सुरक्षित रखा जा सके।
