हिमाचल में चंद्रताल, शिकारी देवी और चूड़धार की ओर नई सड़कों पर हाईकोर्ट की रोक, पर्यावरण संरक्षण को लेकर सख्त रुख
शिमला। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने चंद्रताल, शिकारी देवी और चूड़धार जैसे पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में सड़क निर्माण को लेकर बड़ा आदेश दिया है। अदालत ने इन क्षेत्रों की ओर प्रस्तावित नई सड़कों और मौजूदा सड़कों पर तारकोल बिछाने के प्रस्तावों पर तत्काल रोक लगाने के निर्देश दिए हैं।
मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए इसे जनहित याचिका के रूप में दर्ज करने का आदेश दिया। कोर्ट ने हिमाचल सरकार के प्रधान सचिव (वन), प्रधान मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ) और प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोटिस जारी किया है। मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर को होगी।
अदालत ने पर्यावरणीय रूप से नाजुक क्षेत्रों में बढ़ती मानवीय गतिविधियों और पर्यटन के कारण हो रहे नुकसान पर चिंता जताई। कोर्ट ने पाया कि वन संरक्षण अधिनियम के तहत अनुमति मिलने के बावजूद ऐसे क्षेत्रों में मोटर योग्य सड़कें बनाई जा रही हैं, जबकि इन इलाकों में स्थानीय आबादी बेहद कम है और पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
वाहनों की सीधी पहुंच पर कोर्ट की चिंता
हाईकोर्ट ने कहा कि चंद्रताल झील, शिकारी देवी मंदिर और चूड़धार मंदिर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों तक वाहनों की सीधी पहुंच से वन और प्राकृतिक पर्यावरण प्रभावित हो सकता है। सड़क सुविधा बढ़ने के साथ इन इलाकों में पर्यटकों की आवाजाही और मानवीय गतिविधियों में भी वृद्धि होने की आशंका है।
चंद्रताल में कैंपिंग और कचरा प्रबंधन पर सवाल
सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि वन विभाग की ओर से चंद्रताल झील के आसपास पर्यटकों को रात में ठहरने और कैंपिंग की अनुमति दी जा रही है। इस पर कोर्ट ने वहां उत्पन्न होने वाले प्लास्टिक कचरे और मानव अपशिष्ट के निपटारे की व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठाए।
अदालत ने पूछा कि इन क्षेत्रों में कचरे के उचित निपटारे की क्या व्यवस्था है और क्या पर्यटकों के लिए मोबाइल शौचालय जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। कोर्ट ने संवेदनशील पर्यावरणीय क्षेत्रों में प्लास्टिक कचरा फैलने को लेकर भी चिंता व्यक्त की।
हाईकोर्ट के इस रुख से स्पष्ट है कि हिमाचल के उच्च हिमालयी और पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में सड़क, पर्यटन और विकास परियोजनाओं के साथ पर्यावरण संरक्षण को लेकर अब कड़ी निगरानी की जा रही है।
