सराहाँ में जल शक्ति विभाग के प्रधान सचिव का दौरा, जल संकट से निपटने के लिए नवाचार पर जोर
आने वाले 20 वर्षों में दुनिया के सामने जल संकट की चुनौती और गंभीर हो सकती है। इसी को देखते हुए जल शक्ति विभाग के प्रधान सचिव डॉ. अभिषेक जैन ने अधिकारियों से जल संरक्षण और प्रबंधन के लिए अभी से नए एवं अभिनव समाधान विकसित करने का आह्वान किया।
सराहाँ (सिरमौर)। जल शक्ति विभाग के प्रधान सचिव डॉ. अभिषेक जैन, आईएएस ने जल शक्ति विभाग उप-मंडल सराहाँ का दौरा किया। इस दौरान अधीक्षण अभियंता नाहन, अधिशासी अभियंता राजगढ़ तथा सहायक अभियंता नरग एवं सराहन सहित विभागीय अधिकारी और फील्ड स्टाफ उपस्थित रहे।
दौरे के दौरान डॉ. जैन ने विभागीय कार्यों में दक्षता, नवाचार, जवाबदेही और बेहतर जनसेवा सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों को जल संसाधनों के संरक्षण के साथ-साथ योजनाओं को स्थानीय जरूरतों के अनुरूप तैयार करने के निर्देश दिए।
सिंचाई योजनाओं में बढ़ेगी सामुदायिक भागीदारी
प्रधान सचिव ने सिंचाई योजनाओं में सामुदायिक भागीदारी बढ़ाने तथा कृषि विकास संघ (KVS) के गठन पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों की भागीदारी से योजनाओं को अधिक प्रभावी और टिकाऊ बनाया जा सकता है।
उन्होंने प्रत्येक जिले में एक प्रमुख नदी और उसकी सहायक नदियों के पुनर्जीवन की दिशा में भी गंभीरता से कार्य करने को कहा। इसके साथ ही बावड़ियों, कूहलों और अन्य पारंपरिक जलस्रोतों के संरक्षण एवं पुनर्जीवन पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए।
नई योजनाओं की प्लानिंग स्टेज में ही ली जाए जन-सलाह
डॉ. जैन ने स्पष्ट निर्देश दिए कि किसी भी नई पेयजल अथवा सिंचाई योजना की प्लानिंग स्टेज में ही जन-सलाह और जनभागीदारी को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए। इससे योजनाओं को स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करने के साथ उनकी दीर्घकालिक उपयोगिता भी सुनिश्चित की जा सकेगी।
उन्होंने अधिकारियों से जल संकट की भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए नवीन और अभिनव विचार विकसित करने का आह्वान किया।
पौधारोपण कर दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश
दौरे के दौरान प्रधान सचिव ने उप-मंडल परिसर में पौधारोपण भी किया। उन्होंने अधिकारियों एवं कर्मचारियों को पर्यावरण संरक्षण के लिए अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनके संरक्षण की दिशा में कार्य करने के लिए प्रेरित किया।
इसके अलावा उन्होंने अधिकारियों और फील्ड स्टाफ के बीच नियमित संवाद बनाए रखने तथा असंगठित कार्यों को व्यवस्थित एवं संरचित करने पर भी जोर दिया।
प्रधान सचिव के मार्गदर्शन से विभागीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों को जल संरक्षण, सतत जल प्रबंधन, नवाचार और जन-केंद्रित सेवा वितरण की दिशा में महत्वपूर्ण मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।
