हिमाचल में HRTC का बड़ा ग्रीन प्लान: 5 साल में आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य, आएंगी 1000 ई-बसें और 200 हाइड्रोजन बसें
शिमला। हिमाचल में HRTC को लेकर सरकार ने अगले पांच वर्षों का बड़ा लक्ष्य तय कर दिया है—निगम को आत्मनिर्भर बनाने के साथ प्रदेश की सड़कों पर 1,000 इलेक्ट्रिक और 200 हाइड्रोजन बसें उतारने की तैयारी है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि यह योजना सार्वजनिक परिवहन को आधुनिक बनाने के साथ हिमाचल को ग्रीन ट्रांसपोर्ट की दिशा में आगे ले जाएगी।
मुख्यमंत्री ने सोमवार को वर्चुअल माध्यम से मंडी के पड्डल मैदान से जिले के लिए 25 नई टाइप-1 इलेक्ट्रिक बस सेवाओं का शुभारंभ किया। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार HRTC के इलेक्ट्रिक बस बेड़े को मजबूत करने के लिए 297 नई टाइप-1 इलेक्ट्रिक बसें खरीद चुकी है। इन बसों का संचालन शिमला, नाहन, नालागढ़, ऊना, हरोली, बिलासपुर, देहरा, हमीरपुर, पालमपुर, धर्मशाला और नगरोटा समेत विभिन्न क्षेत्रों में किया जा रहा है।
180 किलोमीटर की निर्धारित रेंज
मुख्यमंत्री के अनुसार टाइप-1 इलेक्ट्रिक बसों की निर्धारित ड्राइविंग रेंज 80 प्रतिशत स्टेट ऑफ चार्ज पर करीब 180 किलोमीटर है। वहीं शिमला-चंडीगढ़ मार्ग पर एक बार चार्ज करने के बाद इलेक्ट्रिक बस करीब 270 किलोमीटर तक चल रही है।
पहाड़ी राज्य के कठिन भौगोलिक क्षेत्र में इलेक्ट्रिक बसों का यह प्रदर्शन लंबी दूरी के अंतर-शहरी मार्गों पर इनके विस्तार की संभावनाओं को मजबूत करता है।
डीजल बसों के मुकाबले 12 से 13 रुपये प्रति किलोमीटर की बचत
सुक्खू ने कहा कि इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से HRTC की ऊर्जा लागत में भी कमी आ रही है। डीजल बसों की तुलना में इलेक्ट्रिक बसों के संचालन में करीब 12 से 13 रुपये प्रति किलोमीटर की बचत हो रही है।
सरकार का मानना है कि इससे निगम के ईंधन और परिचालन खर्च को कम करने के साथ सार्वजनिक परिवहन की दक्षता बढ़ाने में मदद मिलेगी। इलेक्ट्रिक बसों के विस्तार से कार्बन उत्सर्जन और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता घटाने में भी मदद मिलेगी।
कुल्लू, मंडी और सुंदरनगर में चार्जिंग ढांचा तैयार
मुख्यमंत्री ने बताया कि कुल्लू, मंडी और सुंदरनगर में इलेक्ट्रिक बसों के संचालन के लिए आवश्यक चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा चुका है। इससे इन क्षेत्रों में नई इलेक्ट्रिक बस सेवाओं का विस्तार संभव होगा।
हर साल करीब 840 करोड़ रुपये का अनुदान
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार HRTC को बसें उपलब्ध करवाने के साथ हर साल करीब 840 करोड़ रुपये का अनुदान देती है। वहीं निगम अपने संसाधनों से भी लगभग इतनी ही राशि अर्जित कर रहा है।
सरकार का लक्ष्य अगले पांच वर्षों में HRTC को आत्मनिर्भर बनाना है। इसी दिशा में इलेक्ट्रिक और हाइड्रोजन बसों के बेड़े का विस्तार किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने अपने पहले बजट में ‘ग्रीन हिमाचल’ की परिकल्पना रखी थी और इलेक्ट्रिक बसों का विस्तार इसी विजन का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
कार्यक्रम में अतिरिक्त मुख्य सचिव ओंकार चंद शर्मा और HRTC के प्रबंध निदेशक शिवम प्रताप सिंह शिमला में मुख्यमंत्री के साथ मौजूद रहे। मंडी में आयोजित कार्यक्रम में HRTC उपाध्यक्ष अजय वर्मा, APMC अध्यक्ष संजीव गुलेरिया, जल प्रबंधन बोर्ड के उपाध्यक्ष शशि शर्मा, जिला कांग्रेस कमेटी मंडी अध्यक्ष चंपा ठाकुर सहित अन्य गणमान्य मौजूद रहे।
