Himachal Monsoon: बारिश ने बढ़ाई मुश्किलें, 110 सड़कें बंद; 973 करोड़ से ज्यादा का नुकसान
हिमाचल प्रदेश में मानसून की बारिश ने एक बार फिर जनजीवन की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है। प्रदेश में 110 सड़कें बंद हैं, जबकि 91 बिजली ट्रांसफार्मर और 217 पेयजल योजनाएं प्रभावित होने से कई इलाकों में लोगों की परेशानियां बढ़ गई हैं।
राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र (SEOC) की 17 अगस्त सुबह 10 बजे की रिपोर्ट के अनुसार, बारिश और खराब मौसम के चलते प्रदेश के कई जिलों में सड़क, बिजली और पेयजल व्यवस्था प्रभावित हुई है। एक दिन पहले शाम की रिपोर्ट में 109 सड़कें, सात डीटीआर और 216 पेयजल योजनाएं प्रभावित थीं।
मंडी और कुल्लू में सबसे ज्यादा सड़कें प्रभावित
सड़क बंद होने के मामलों में मंडी जिला सबसे आगे है। यहां कुल 39 सड़कें बंद हैं। इनमें सराज उपमंडल की 25, थलौट की पांच, पधर की सात तथा सुंदरनगर, जोगिंद्रनगर और सरकाघाट की सड़कें शामिल हैं।
कुल्लू जिले में 33 सड़कें बंद हैं। बंजार में 12, कुल्लू में आठ, आनी में पांच और निरमंड में आठ सड़कें प्रभावित हैं। इससे ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में आवाजाही प्रभावित हो रही है।
चंबा और शिमला में भी सड़कें बंद
चंबा जिले में 12 सड़कें बंद हैं। डलहौजी में एक, भरमौर में दो, सलूणी में तीन, पांगी में एक और भटियात में पांच सड़कें प्रभावित हैं।
शिमला जिले में नौ सड़कें बंद हैं। इनमें रामपुर की सात, चौपाल और सुन्नी की एक-एक सड़क शामिल है।
वहीं सिरमौर में नाहन की दो, संगड़ाह की तीन और राजगढ़ की एक सड़क बंद बताई गई है। कांगड़ा में छह, ऊना में चार और लाहौल-स्पीति में एक सड़क प्रभावित है। रिपोर्ट के समय किन्नौर, हमीरपुर और बिलासपुर में सड़क बंद होने की सूचना नहीं थी।
91 ट्रांसफार्मर और 217 पेयजल योजनाएं प्रभावित
बारिश का असर बिजली और पेयजल आपूर्ति पर भी पड़ा है। प्रदेश में 91 डीटीआर यानी बिजली ट्रांसफार्मर बाधित हैं, जबकि 217 पेयजल योजनाएं प्रभावित हुई हैं।
जिला स्तर पर बिजली व्यवस्था में मंडी के 28, शिमला के 22 और सिरमौर के 41 डीटीआर प्रभावित बताए गए हैं। इससे कई क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति बहाल करने की चुनौती बनी हुई है।
मानसून में 973 करोड़ से ज्यादा का नुकसान
सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, 30 जून से 16 अगस्त 2026 तक प्रदेश में मानसून के कारण कुल 97,315.76 लाख रुपये यानी करीब 973.16 करोड़ रुपये का नुकसान दर्ज किया जा चुका है।
इसमें लोक निर्माण विभाग, बिजली, जल आपूर्ति, स्वास्थ्य, शिक्षा, ग्रामीण एवं शहरी विकास सहित विभिन्न क्षेत्रों को हुआ नुकसान शामिल है। बारिश का दौर जारी रहने के कारण बंद सड़कों को खोलना और बिजली-पानी की प्रभावित सेवाओं को बहाल करना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।
