बरसात के बाद हिमाचल की सड़कों की बदलेगी तस्वीर, टारिंग का काम होगा शुरू
शिमला। बरसात खत्म होते ही हिमाचल प्रदेश की खराब सड़कों को लेकर बड़ा अभियान शुरू होने जा रहा है। सड़कों की टारिंग के लिए सरकार ने तैयारी तेज कर दी है और केंद्र से अतिरिक्त बजट को भी मंजूरी मिल चुकी है।
लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि बरसात के दौरान बंद सड़कों को बहाल रखने के लिए पूरे प्रदेश में जेसीबी और पोकलेन मशीनें हायर कर तैनात की गई हैं। बंद सड़कों और उनकी बहाली की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है।
उन्होंने बताया कि बरसात के बाद प्रदेश में सड़कों की टारिंग का काम शुरू किया जाएगा। युद्ध के कारण बिटुमेन (कोलतार) के दाम करीब दोगुने हो गए थे। इसके चलते टेंडर होने के बावजूद समर टारिंग सीजन में कई सड़कों पर टारिंग और मेटलिंग का काम नहीं हो सका।
मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ने इसके लिए बजट बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। बरसात खत्म होते ही संबंधित सड़कों के टेंडर किए जाएंगे और इसके बाद टारिंग का काम शुरू होगा। सरकार का दावा है कि इससे प्रदेश की खराब सड़कों की समस्या का स्थायी समाधान करने में मदद मिलेगी।
शिमला ग्रामीण में 650 करोड़ के विकास कार्य
विक्रमादित्य सिंह ने बताया कि शिमला ग्रामीण क्षेत्र में विभिन्न विकास कार्यों पर करीब 650 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। वहीं, केंद्र ने जिले के सेब बहुल क्षेत्रों की सड़कों के लिए 240 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं।
इसमें छैला-यशवंतनगर-नेरीपुल सड़क के अपग्रेडेशन के लिए 203 करोड़ रुपये और रामपुर की टिककर-खमाड़ी सड़क के बचे हुए हिस्से के अपग्रेडेशन के लिए 36 करोड़ रुपये शामिल हैं। इन सड़कों पर जल्द काम शुरू होने की बात कही गई है।
भाजपा नेताओं पर कार्रवाई के सवाल पर क्या बोले मंत्री?
भाजपा नेताओं और विधायकों पर हो रही कार्रवाई को लेकर पूछे गए सवाल पर लोक निर्माण मंत्री ने कहा कि गृह विभाग मुख्यमंत्री के अधीन है। इसलिए इस मामले में जवाब देने के लिए मुख्यमंत्री ही उचित व्यक्ति हैं।
उन्होंने कहा कि विधायकों और पूर्व विधायकों के खिलाफ हुई कार्रवाई मुख्यमंत्री के अधिकार क्षेत्र में आती है। साथ ही उन्होंने भाजपा की ओर से लाई जाने वाली चार्जशीट को “झूठ का पुलिंदा” करार दिया।
