Himachal: 200 साल पुराने बरगद के चारों ओर निर्माण पर NGT सख्त, सरकार से मांगा जवाब
शिमला। दो सौ साल पुराने बरगद की जड़ों के आसपास किया गया निर्माण अब हिमाचल सरकार के लिए सवाल बन गया है। संरक्षित वन क्षेत्र में पेड़ के चारों ओर बनाए गए सुरक्षात्मक प्लेटफॉर्म को लेकर NGT ने वैधानिक अनुमति और निर्माण की स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने हिमाचल प्रदेश सरकार से छह सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। मामला परमजीत मनकोटिया बनाम हिमाचल प्रदेश सरकार एवं अन्य से जुड़ा है, जिसमें संरक्षित वन क्षेत्र में स्थित करीब 200 साल पुराने बरगद के चारों ओर बनाए गए प्लेटफॉर्म को लेकर सवाल उठाए गए हैं।
11 अगस्त 2026 को NGT की प्रधान पीठ में अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफरोज अहमद ने मामले की सुनवाई की। सुनवाई के दौरान अधिकरण ने वन विभाग के प्रधान सचिव को शपथपत्र दाखिल कर यह स्पष्ट करने को कहा कि बरगद के चारों ओर बनाए गए प्लेटफॉर्म का निर्माण किस प्रक्रिया के तहत किया गया और इसके लिए सक्षम प्राधिकरण से आवश्यक अनुमति ली गई थी या नहीं।
पेड़ की सुरक्षा के लिए बनाया गया था प्लेटफॉर्म
प्रतिवादी पक्ष की ओर से दाखिल जवाब में बताया गया कि बरगद के चारों ओर एक छोटा सुरक्षात्मक बैठने का प्लेटफॉर्म यानी टियाला बनाया गया था। अधिकारियों के अनुसार इसका उद्देश्य पेड़ की सुरक्षा करना, उसकी जड़ों के आसपास मिट्टी के कटाव को रोकना और वहां आने-जाने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना था।
अधिकारियों ने यह भी बताया कि पेड़ के आसपास लोगों की आवाजाही अधिक रहती है और नजदीक ही एक सरकारी स्कूल भी स्थित है। क्षेत्र में भारी बारिश और प्राकृतिक आपदाओं की स्थिति को देखते हुए निर्माण को सुरक्षा और निवारक उपाय के तौर पर बताया गया।
निर्माण कार्य रोका गया
जवाब में यह भी कहा गया कि संबंधित निर्माण कार्य को रोक दिया गया है। हालांकि, NGT ने इस बात पर ध्यान दिया कि बरगद का पेड़ संरक्षित वन क्षेत्र में स्थित है। ऐसे में अधिकरण ने निर्माण की अनुमति और उसकी वैधानिक स्थिति को स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं।
वन विभाग के प्रधान सचिव को अब छह सप्ताह के भीतर शपथपत्र दाखिल करना होगा। मामले की अगली सुनवाई 30 अक्टूबर 2026 को निर्धारित की गई है।
अब निगाहें इस बात पर हैं कि राज्य सरकार NGT के समक्ष निर्माण की अनुमति, प्रक्रिया और उसकी कानूनी स्थिति को लेकर क्या जवाब दाखिल करती है।
