कालाअंब में 10 के बदले 90 का लालच! वेतन मिलने के समय ही सक्रिय होता है कथित दड़ा-सट्टा गिरोह, मजदूरों को बना रहे निशाना
कालाअंब (सिरमौर)। कालाअंब में वेतन मिलते ही सक्रिय हो जाता है कथित ‘90 के लालच’ वाला खेल, जहां 10 रुपये के बदले 90 रुपये जीतने का सपना दिखाया जाता है। दांव लगाने वालों को फंसाने के लिए गिरोह के अपने ही सदस्य पहले जीतने का नाटक करते हैं और पुलिस की गतिविधियों पर भी नजर रखते हैं।
वेतन की तारीखों पर बढ़ जाती है सक्रियता
कालाअंब औद्योगिक क्षेत्र में हर माह 7 से 15 तारीख के बीच कथित तौर पर दड़ा-सट्टा खेलने वाले गिरोह सक्रिय हो जाते हैं। जानकारी के अनुसार, इस अवधि में उद्योगों में काम करने वाले कामगारों और मजदूरों को वेतन मिलता है, जिसके चलते गिरोह की गतिविधियां भी बढ़ जाती हैं।
बताया जा रहा है कि 20 से 25 तारीख के बीच भी ये गिरोह सक्रिय रहते हैं। इन दिनों कई कामगारों को एडवांस राशि मिलने का समय तय होता है। आरोप है कि इसी को ध्यान में रखते हुए कथित गिरोह इन तारीखों को अपना निशाना बनाने के लिए चुनते हैं।
5-6 लोगों का गिरोह, दो की नजर पुलिस पर
जानकारी मिली है कि इस कथित गिरोह में करीब 5 से 6 लोग शामिल होते हैं। इनमें से दो सदस्य पुलिस या पुलिस की गाड़ी की गतिविधियों पर नजर रखते हैं, जबकि अन्य सदस्य दड़ा-सट्टे की गिटियों या पर्चियों पर दांव लगाते हैं।
सबसे खास तरीका यह बताया जा रहा है कि गिरोह के कुछ सदस्य खुद दांव लगाकर जीतने का नाटक करते हैं। इससे वहां मौजूद लोगों को लगता है कि इस खेल में आसानी से पैसा कमाया जा सकता है। इसी लालच में नए लोग दांव लगाने के लिए आकर्षित होते हैं।
मजदूरों का वेतन तक लगा दांव पर
बताया जा रहा है कि कई युवा और कामगार कथित तौर पर इस लालच में अपना वेतन तक दांव पर लगा चुके हैं। शुरुआत में जीत का माहौल देखकर वे ज्यादा पैसे लगाने लगते हैं, लेकिन बाद में नुकसान होने पर उनके हाथ कुछ नहीं लगता।
कुछ ऐसे ही लोगों ने बताया कि गिरोह बेहद शातिर तरीके से लोगों को अपने जाल में फंसाता है। पहले जीत का भरोसा पैदा किया जाता है और फिर व्यक्ति को लगातार दांव लगाने के लिए उकसाया जाता है।
स्थानीय पुलिस की लोगों से अपील
स्थानीय लोगों और कामगारों से अपील की जा रही है कि 10 के बदले 90 रुपये जैसे लालच में आकर अपना मेहनत का पैसा दांव पर न लगाएं। यदि किसी स्थान पर इस तरह की गतिविधि चल रही है तो इसकी सूचना पुलिस को देकर ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई में सहयोग करें।
नोट: यह रिपोर्ट स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी और लोगों द्वारा बताए गए तथ्यों पर आधारित है। कथित गिरोह और उनके सदस्यों की पहचान तथा गतिविधियों की पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी।
