Himachal News: हिमाचल में पेट्रोल-डीजल हुआ महंगा, अब हर लीटर पर लगेगा 60 पैसे अनाथ-विधवा सेस
हिमाचल में पेट्रोल-डीजल भरवाने वालों की जेब पर अब थोड़ा और भार पड़ेगा। मंगलवार मध्यरात्रि से प्रदेश में पेट्रोल और हाई स्पीड डीजल की कीमत में 60 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी होने जा रही है।
शिमला। राज्य सरकार ने अनाथ बच्चों और विधवाओं के कल्याण के लिए पेट्रोल-डीजल पर 60 पैसे प्रति लीटर का नया सेस लागू करने की अधिसूचना जारी कर दी है। इसके बाद प्रदेश में पेट्रोल और हाई स्पीड डीजल की कीमतें बढ़ जाएंगी।
पहली बिक्री पर लगाया जाएगा नया सेस
राज्य कर एवं आबकारी विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक यह सेस हिमाचल प्रदेश मूल्य वर्धित कर (वैट) अधिनियम, 2005 की धारा 6-ए के तहत पेट्रोल और हाई स्पीड डीजल की पहली बिक्री (Point of First Sale) पर लगाया जाएगा।
सरकार के इस फैसले के बाद उपभोक्ताओं को पेट्रोल और डीजल के लिए पहले की तुलना में 60 पैसे अधिक चुकाने होंगे।
शिमला में पेट्रोल 103 रुपये के पार
नए सेस का असर पेट्रोल की कीमत पर भी साफ दिखाई देगा। राजधानी शिमला में पेट्रोल का मौजूदा दाम 102.45 रुपये प्रति लीटर है, जो 60 पैसे की बढ़ोतरी के बाद 103.05 रुपये प्रति लीटर हो जाएगा।
डीजल की कीमत में भी इसी दर से बढ़ोतरी होगी।
अनाथ बच्चों और विधवाओं की योजनाओं पर खर्च होगा पैसा
सरकार के अनुसार नए सेस से मिलने वाले राजस्व का इस्तेमाल अनाथ बच्चों और विधवाओं के लिए चलाई जा रही विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं को मजबूत करने में किया जाएगा।
प्रदेश मंत्रिमंडल ने हाल ही में इन योजनाओं के लिए अतिरिक्त वित्तीय संसाधन जुटाने के उद्देश्य से पेट्रोल और डीजल पर सेस लगाने को मंजूरी दी थी। अब विभाग ने इसकी अधिसूचना जारी कर दी है।
सरकार बोली- जरूरतमंदों को मिलेगा लाभ
सरकार का कहना है कि नए सेस से जुटाई जाने वाली राशि सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के लिए अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध कराएगी। इससे अनाथ बच्चों और विधवाओं के लिए संचालित योजनाओं को और प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार सरकार ने फिलहाल 60 पैसे प्रति लीटर का सेस निर्धारित किया है। सरकार का यह भी दावा है कि इस बढ़ोतरी के बावजूद हिमाचल में पेट्रोल और डीजल की कीमतें पड़ोसी राज्यों की तुलना में कम रहेंगी।
सेस लगने के बाद राजनीतिक बहस भी संभव
पेट्रोल और डीजल जैसी रोजमर्रा की जरूरत की चीजों पर अतिरिक्त सेस लगाए जाने के बाद इस फैसले को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज हो सकती है। सरकार इसे सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के लिए जरूरी अतिरिक्त संसाधन जुटाने का कदम बता रही है, जबकि विपक्ष इसे आम उपभोक्ता पर बढ़ते आर्थिक बोझ के तौर पर उठा सकता है।
