हिमाचल में नशे के खिलाफ सरकार का बड़ा एक्शन!
चरस तस्करी मामले में फंसे शिक्षा विभाग के लैब अटेंडेंट को विभागीय जांच में दोषी पाए जाने के बाद तत्काल प्रभाव से सरकारी सेवा से बर्खास्त कर दिया गया।
हिमाचल: चरस तस्करी मामले में फंसे लैब अटेंडेंट को सरकारी सेवा से किया बर्खास्त, विभागीय जांच में दोषी मिलने पर बड़ी कार्रवाई
मंडी। हिमाचल प्रदेश में नशे के खिलाफ सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत शिक्षा विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए चरस तस्करी के मामले में फंसे एक लैब अटेंडेंट को सरकारी सेवा से बर्खास्त कर दिया है। विभागीय जांच में कर्मचारी के खिलाफ लगाए गए आरोप सही पाए जाने के बाद यह फैसला लिया गया।
जानकारी के अनुसार, उपनिदेशक उच्च शिक्षा (माध्यमिक) मंडी ने राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला सेरी चेहटीगढ़ में कार्यरत लैब अटेंडेंट महेश्वर सिंह को तत्काल प्रभाव से सेवा से हटाने के आदेश जारी किए हैं। विभागीय जांच में सामने आया कि कर्मचारी 6 फरवरी से 10 फरवरी 2025 तक पुलिस हिरासत में रहा, जबकि 10 फरवरी से 28 मई 2025 तक न्यायिक हिरासत में बंद रहा।
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कर्मचारी के खिलाफ पुलिस जिला नूरपुर में दर्ज एफआईआर संख्या 162/2024 में एनडीपीएस अधिनियम के तहत चरस की अवैध तस्करी, परिवहन और वित्तीय सहयोग जैसे गंभीर आरोप दर्ज हैं। जांच अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि कर्मचारी ने अपनी गिरफ्तारी और हिरासत की सूचना विभाग को नहीं दी, जो सरकारी सेवा आचरण नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है।
बैंक खाते में जमा राशि पर भी नहीं दे सका संतोषजनक जवाब
विभागीय जांच के दौरान कर्मचारी से उसके बैंक खाते में जमा बड़ी धनराशि के संबंध में भी स्पष्टीकरण मांगा गया। हालांकि, वह इस रकम के स्रोत को लेकर विभाग को संतोषजनक जवाब नहीं दे पाया। जांच अधिकारी ने इसे भी उसके खिलाफ एक प्रतिकूल तथ्य माना।
कर्मचारी ने दी थी यह दलील
अपने बचाव में कर्मचारी ने कहा कि उसे हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट से नियमित जमानत मिल चुकी है और उसके खिलाफ चल रहा आपराधिक मामला अभी विचाराधीन है। उसने यह भी तर्क दिया कि किसी अदालत ने उसे अब तक दोषी घोषित नहीं किया है।
विभाग ने कहा- विभागीय जांच और आपराधिक मुकदमा अलग
उपनिदेशक यशवीर धीमान द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि विभागीय जांच और आपराधिक मुकदमे की प्रकृति अलग-अलग होती है। विभागीय जांच में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कर्मचारी का आचरण सेवा नियमों के विपरीत पाया गया। आदेश में राज्य सरकार की नशे के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति का उल्लेख करते हुए कहा गया कि ऐसे कर्मचारी को सेवा में बनाए रखना जनहित, शिक्षा व्यवस्था और विद्यार्थियों के हितों के अनुकूल नहीं है।
इन्हीं तथ्यों को आधार बनाते हुए शिक्षा विभाग ने महेश्वर सिंह को तत्काल प्रभाव से सरकारी सेवा से बर्खास्त करने का निर्णय लिया।
