NGT Notice: हिमाचल की दवा कंपनी पर एनजीटी सख्त, सिरमौर में भी पर्यावरणीय उल्लंघनों की जांच के आदेश
क्या हिमाचल में पर्यावरणीय नियमों की अनदेखी हो रही है? राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की ताजा कार्रवाई ने राज्य की एक दवा कंपनी और सिरमौर में कथित पर्यावरणीय उल्लंघनों को लेकर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
एनजीटी ने एक ओर सोलन की औषधि निर्माण इकाई को नोटिस जारी किया है, वहीं दूसरी ओर सिरमौर में जल स्रोतों के पास कथित अवैध निर्माण और मलबा डंपिंग की निष्पक्ष जांच के निर्देश देकर प्रशासन को दो माह के भीतर कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा है।
नई दिल्ली/शिमला। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की प्रधान पीठ, नई दिल्ली ने हिमाचल प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण से जुड़े दो अलग-अलग मामलों में महत्वपूर्ण आदेश जारी किए हैं। पहले मामले में सोलन जिले के नालागढ़ तहसील के पलासरा गांव स्थित औषधि निर्माण इकाई किइनवान प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ कथित पर्यावरणीय उल्लंघनों को लेकर नोटिस जारी किया गया है, जबकि दूसरे मामले में सिरमौर जिले में कथित पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन की जांच के निर्देश दिए गए हैं।
दवा कंपनी पर गंभीर आरोप
एनजीटी में दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि किइनवान प्राइवेट लिमिटेड ने पर्यावरणीय स्वीकृति (Environmental Clearance) प्राप्त करते समय फॉर्म-II में गलत जानकारी दी। याचिकाकर्ताओं के अनुसार कंपनी ने दावा किया था कि इकाई से कोई अपशिष्ट जल उत्पन्न नहीं होगा और आसपास कोई जल स्रोत मौजूद नहीं है, जबकि कंपनी के निकट चिकनी खड्ड, जो सरसा नदी की सहायक धारा है, स्थित है।
याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि जीरो लिक्विड डिस्चार्ज (Zero Liquid Discharge) इकाई होने के बावजूद कथित रूप से अपशिष्ट जल और रासायनिक कचरा चिकनी खड्ड में छोड़ा जा रहा है। इसके अलावा स्वीकृत एक बोरवेल के स्थान पर छह बोरवेल से भूजल दोहन, विषैले अपशिष्ट जल के अनुचित निस्तारण, मछलियों की मौत और आसपास के पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने जैसे आरोप भी लगाए गए हैं।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की भूमिका भी सवालों में
याचिकाकर्ताओं ने एनजीटी को बताया कि हिमाचल प्रदेश राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने पहले कंपनी को क्लीन चिट दी थी, लेकिन बाद में कथित उल्लंघनों को लेकर कारण बताओ नोटिस जारी किया। उनका दावा है कि इस नोटिस पर अभी तक अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। अपने पक्ष में उन्होंने दस्तावेज, समाचार रिपोर्ट और फोटोग्राफ भी अधिकरण के समक्ष प्रस्तुत किए हैं।
मामले की सुनवाई के दौरान एनजीटी ने माना कि यह प्रकरण पर्यावरण संरक्षण, जल स्रोतों की सुरक्षा और पर्यावरणीय नियमों के पालन से जुड़े गंभीर प्रश्न उठाता है। इसके बाद अधिकरण ने सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी करते हुए अगली सुनवाई से पहले नोटिस की तामील का शपथपत्र दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
यह आदेश 31 जुलाई 2026 को न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव (अध्यक्ष) और डॉ. अफरोज अहमद (विशेषज्ञ सदस्य) की पीठ ने मूल आवेदन संख्या 446/2026 (धर्मिंदर सिंह एवं अन्य बनाम किइनवान प्रा. लि. एवं अन्य) में पारित किया। मामले की अगली सुनवाई 12 अक्तूबर 2026 को होगी।
सिरमौर में भी जांच के निर्देश
एनजीटी ने सिरमौर जिले में कथित पर्यावरणीय उल्लंघनों के मामले को भी गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन को जांच के निर्देश दिए हैं। मामला नदियों और अन्य जल स्रोतों के समीप खनन निरीक्षण चौकी, वज़न पुल (वेब्रिज) के कथित अवैध निर्माण तथा मलबा डंप किए जाने के आरोपों से संबंधित है।
अधिकरण ने जिला मजिस्ट्रेट एवं उपायुक्त, सिरमौर को निर्देश दिए हैं कि वे शिकायत की निष्पक्ष जांच कराएं और संबंधित स्थल का निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति की रिपोर्ट प्रस्तुत करें।
एनजीटी ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि यदि जांच में पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित अधिकारियों द्वारा दो माह के भीतर सुधारात्मक (Remedial) और दंडात्मक (Punitive) कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
यह आदेश 31 जुलाई 2026 को न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और डॉ. अफरोज अहमद की पीठ ने मूल आवेदन संख्या 231/2026 (नाथूराम चौहान बनाम हिमाचल प्रदेश राज्य एवं अन्य) में पारित किया।
पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अहम कदम
एनजीटी के इन दोनों आदेशों को हिमाचल प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण, जल स्रोतों की सुरक्षा और औद्योगिक गतिविधियों की निगरानी के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब सभी की निगाहें संबंधित विभागों और जिला प्रशासन की जांच रिपोर्ट तथा आगामी सुनवाई पर टिकी हैं।
