Himachal News: पहली बार भारत में खिला नीदरलैंड का पियोनी फूल, पालमपुर के वैज्ञानिकों ने रचा नया इतिहास
क्या अब 400 रुपये में मिलने वाला विदेशी फूल भारतीय किसानों की कमाई का नया जरिया बनेगा?
पालमपुर के वैज्ञानिकों की इस उपलब्धि से हिमालयी राज्यों के किसानों के लिए आय के नए रास्ते खुलने की उम्मीद जगी है।
कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश के पालमपुर स्थित सीएसआईआर के वैज्ञानिकों ने कृषि अनुसंधान के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए पहली बार भारत में नीदरलैंड के बहुमूल्य और आकर्षक पियोनी (Peony) फूल को सफलतापूर्वक तैयार किया है। वर्षों के शोध और परीक्षण के बाद संस्थान के कृषि फार्म में यह फूल सफेद और गुलाबी रंगों में पूरी खूबसूरती के साथ खिला है।
अब तक इस फूल को भारत में उपयोग के लिए मुख्य रूप से नीदरलैंड से आयात किया जाता था। वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि इसका व्यावसायिक उत्पादन सफल रहता है तो भारत की विदेशी आयात पर निर्भरता कम होगी और किसानों को एक नया लाभकारी विकल्प मिलेगा।
ऊंचाई वाले क्षेत्रों में शुरू हुआ ट्रायल
पियोनी फूल की व्यावसायिक खेती की संभावनाओं को देखते हुए लद्दाख, हिमाचल के लाहौल और उत्तराखंड के नैनीताल के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में किसानों के खेतों में परीक्षण के तौर पर इसकी पौध लगाई गई है। प्रत्येक स्थान पर करीब 100-100 कलियां रोपी गई हैं, ताकि अलग-अलग जलवायु परिस्थितियों में इसके प्रदर्शन का आकलन किया जा सके।
एक बार तैयार होने के बाद 30 साल तक देगा फूल
पियोनी ठंडी जलवायु में पनपने वाला पौधा है, जिसे पूरी तरह तैयार होने में लगभग चार वर्ष लगते हैं। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि एक बार पौधा स्थापित होने के बाद यह लगातार 25 से 30 वर्षों तक गुणवत्तापूर्ण फूल देता रहता है। यही कारण है कि इसे लंबे समय तक आय देने वाली फसल माना जा रहा है।
शादी और बड़े आयोजनों में रहती है भारी मांग
देश के बड़े शहरों में होने वाली हाई-प्रोफाइल शादियों, कॉर्पोरेट कार्यक्रमों और भव्य आयोजनों में सजावट के लिए पियोनी फूल की काफी मांग रहती है। फिलहाल इसे हवाई मार्ग से नीदरलैंड से मंगाया जाता है, जिसके कारण इसकी कीमत 300 से 400 रुपये प्रति फूल तक पहुंच जाती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारतीय किसान इसका व्यावसायिक उत्पादन शुरू करते हैं तो इसकी कीमत घटकर 100 से 150 रुपये प्रति फूल रह सकती है। इससे उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी और किसानों की आय में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी।
वैज्ञानिक ने क्या कहा?
सीएसआईआर पालमपुर के ट्यूलिप गार्डन के प्रभारी डॉ. भव्य भार्गव ने बताया कि लद्दाख, लाहौल और नैनीताल में ट्रायल के तौर पर किसानों के खेतों में 100-100 कलियां लगाई गई हैं। उनका कहना है कि यह फूल नीदरलैंड से आयात पर निर्भरता कम करेगा और सफल परिणाम मिलने पर ठंडे पर्वतीय क्षेत्रों की कृषि अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे सकता है।
